शाहजहांपुर/परौर। बाढ़ के असर से कलान और जलालाबाद तहसील क्षेत्र में गंगा, रामगंगा समेत अन्य सहायक नदियों के जलस्तर में शनिवार को भी उतार-चढ़ाव बना रहा लेकिन जिन क्षेत्रों में पानी कम हुआ है, वहां संक्रामक बीमारियां पनपने लगी हैं। परौर क्षेत्र के मोहनपुर, मंझा, नरायननगला आदि गांवों में तमाम लोग मच्छरजनित मलेरिया, वायरल बुखार की चपेट में आ गए हैं। मिर्जापुर क्षेत्र के गांव आजादनगर और इस्लामनगर से गंगा का पानी निकल चुका है लेकिन गांव के अंदर कीचड़ और सड़ांध के कारण बीमारियों से बचने के लिए कई परिवार चौंरा-बसोला रोड पर डेरा डाले हैं। इधर, महानगर में खन्नौत के तटवर्ती दलेलगंज इलाके में लोग बीमारियां फैलने को लेकर आशंकित हैं। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित 250 परिवारों को राशन की किटें बांटी हैं लेकिन अभी तक दवाएं उपलब्ध कराने की जरूरत नहीं समझी।
मिर्जापुर और परौर क्षेत्र में तमाम ऐसे गांव हैं, जहां के बाशिंदों को बाढ़ के दौरान और उसके बाद की दोहरी विपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि 72 घंटे से गंगा में पानी लगातार घट रहा है लेकिन जलस्तर मेें मामूली गिरावट के चलते आसपास के गांवों में रहने वाले लोग अभी भी बाढ़ को लेकर भयभीत हैं। कलान के भैंसार बांध पर बीते 24 घ्ंाटे की तुलना में गंगा का जलस्तर महज एक सेमी घटा है। वहां नदी 143.48 मीटर पर बह रही है। इस बीच, नरौरा बैराज से शनिवार सुबह 175984 क्यूसेक पानी रिलीज कर दिया। नरौरा से निकली पानी की यह खेप मानसून के चालू सीजन में सर्वाधिक होने के कारण रविवार को गंगा का जलस्तर फिर बढ़ने के आसार पैदा हो गए हैं।
तीन दिन में गंगा का जलस्तर चार सेमी घटने के कारण नदी के किनारे स्थित गांवों में घरों के अंदर से पानी निकल चुका है लेकिन बाढ़ वहां कीचड़ और घास-फूस की सड़ांध छोड़ गई है। ऐसे माहौल में रहने पर लोगों को बीमारियों की चपेट में आने का भय सता रहा है। इसलिए तमाम ग्रामीण अपने घरों को लौटने को तैयार नहीं हैं। इस वजह से लोग ऊंचे स्थानों पर पन्नियां और तिरपाल तानकर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव लौटने पर उन्हें दोबारा बाढ़ और बीमारियों से जूझना पड़ सकता है। इन परिवारों को राशन समेत अन्य जरूरी चीजें तो मिली हैं, लेकिन बुखार, खांसी, उल्टी-दस्त जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव को दवाओं और पशुओं के लिए चारा की सख्त जरूरत है।
खन्नौत में बाढ़ से घिरे दलेलगंज के कई मकान
महानगर के पूर्वी छोर पर बह रही खन्नौत नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे में 70 सेमी घट चुका है लेकिन तटवर्ती इलाकों से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। ऋषि आश्रम से लेकर इंदिरानगर कालोनी तक, बंका घाट से लेकर प्रताप एन्क्लेव तक और दलेलगंज से सरायकाइयां पुलिस चौकी के पीछे तक खन्नौत की बाढ़ मकानों की पिछली दीवारों से टकरा रही है। केरूगंज से पक्का पुल की ओर बढ़ते ही दलेलगंज में कई मकानों के पिछले हिस्से बाढ़ से घिरे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बाढ़ के दौरान हैंडपंप गंदा पानी उगल रहे हैं और इससे बीमारियाें की आशंका सता रही है।
नदियों का जलस्तर और उनमें उतार चढ़ाव (मीटर में)
नदी जलस्तर जलस्तर मेें वृद्धि/कमी
गंगा (भैंसार बांध) 143.48 -0.01
गंगा (कछला घाट) 163.70 +0.10
रामगंगा (चौबारी) 159.40 +0.08
गर्रा 146.40 -0.30
खन्नौत 144.15 -0.70
(स्रोत: सिंचाई विभाग का बाढ़ नियंत्रण कक्ष)
कलान क्षेत्र में बनाई 61 चौकियां
शाहजहांपुर। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कहा है कि बाढ़ प्रभावितों की हर संभव मदद की जाएगी। बाढ़ग़्रस्त कलान तहसील क्षेत्र में 61 चौकियां बनाई गई हैं। बाढ़ प्रभावित गांव पैलानी उत्तरी के मजरा आजादनगर, इस्लामनगर, परौर आदि के 250 परिवारों को आवश्यक वस्तुओं की किट उपलब्ध करा दी गई हैं। किट में घी, रिफाइंड तेल, लाई, दस किलो आटा, दस किलो चावल, दस किलो आलू, दो किलो भुना चना, दो किलो अरहर की दाल, दो किलो नमक, 50 ग्राम हल्दी, 250 ग्राम लाल मिर्च, 250 ग्राम धनिया, पांच लीटर मिट्टी का तेल, एक पैकेट मोमबत्ती, एक पैकेट माचिस, दस पैकेट बिस्कुट, दो नहाने के साबुन, 100 क्लोरीन टेबलेट आदि शामिल है। डीएम ने कहा कि बाढ़ से बचाव को प्रशासनिक तंत्र पूरे मन से लगकर कार्य कर रहा है। राशन और अन्य जरूरी चीजों से प्रभावित परिवारों को वंचित नहीं रखा जाएगा।
बुधवार से खन्नौत में उफान आने से ऐसा लगा कि दलेलगंज की तराई बस्ती डूब जाएगी। अब पानी उतरने के बाद नदी के किनारे गंदगी और उससे पैदा हुई बदबू से वहां खड़ा होना कठिन हो रहा है।
-छोटेलाल उर्फ छोटू, दलेलगंज
खन्नौत मेें हर साल बारिश के दिनों में नदी चढ़ने के साथ घरों में लगे हैंडपंपों का पानी खराब होने लगता है। जिन लोगों के घर नदी के पास बने हैं, उन्हें ऊंचाई वाले स्थानों के इंडिया मार्क हैंडपंपों से पानी लाना पड़ता है।
-सुरेश मसीह, दलेलगंज