शाहजहांपुर। ग्रीष्मकालीन कीट, रोग एवं खरपतवार प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि खेती में रसायनों के प्रयोग से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों को परंपरागत खेती पर जोर देना चाहिए। इससे फसल के उत्पादन में वृद्धि होगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि खेत की मेड़ों की सफाई रखनी चाहिए। मेड़ों पर उगने वाले खरपतवारों की सफाई से किनारों की प्रभावित फसलों के बीच खाद एवं उर्वरकों की प्रतिस्पर्धा कम हो जाती है। खरपतवारों को अगले फसल में रोका जा सकता है। ग्रीष्मकाल में गहरी जोताई करनी चाहिए। इससे मृदा की संरचना में सुधार होता है। जलधारण की क्षमता भी बढ़ती है।
खेत में कठोर परत को तोड़कर मृदा को जड़ों के विकास के लिए अनुकूल बनाने के लिए ग्रीष्मकालीन जोताई अत्यधिक लाभकारी है। भूमिशोधन के लिए जैविक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा 2.50 किग्रा को 65 से 75 किग्रा गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर आठ से 10 दिन बाद खेत की जोताई करनी चाहिए। इससे पौधा की बढ़वार बढ़ती है। फसल का उत्पादन बढ़ता है।