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किसानों पर प्रकृति की मार

Tue, 08 Sep 2015 11:46 PM IST
मिर्जापुर।
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प्रकृति की मार और सरकार की बेरुखी से इस बार किसान खूून के आंसू रो रहे हैं। रबी फसल अतिवृष्टि में चली गई। अब खरीफ की फसल बारिश नहीं होनेे सेे सूखे में जा रही है। ऐेसेे मेें मजबूर किसान करे तो क्या करे? उनके कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है।
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बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर तैयार की गई रबी की फसल बेमौसम बारिश में नष्ट हो गई। सरकारी सर्वे में रबी की अस्सी फीसदी फसलें नष्ट होना पाया गया। प्रदेश और केंद्र सरकारों ने किसानों का 18 हजार रुपये प्रति हेेक्टेयर की दर से फसल नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा की, लेकिन तमाम किसानों को आज तक फसल नुकसान के नाम पर एक पैसा भी नसीब नहीं हो सका है। गत दिवस मुुआवजे की मांग को लेकर क्षेत्र केे किसानों नेे ब्लाक मुुख्यालय पर बेमियादी भूख हड़ताल शुुरू की। तीन दिन तक चली किसानों की भूख हड़ताल को हमेशा की तरह सरकारी नुमाइंदों ने आश्वासन देकर समाप्त करवा दिया।

पंपसेट से सिंचाई कर बचाई जा रही हैं फसलें
सावन-भादो के महीने में भी बारिश नहीं होने से खरीफ फसलें सूख रही हैं। ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंगफली, तिल, उड़द, धान आदि की फसलें पंपसेट से सिंचाई करके बचाई जा रही हैं। दिन में तेज धूप और पछुआ हवाएं चलने तथा रात में तापमान में भारी गिरावट से धान की फसल फूलने की उम्मीद बहुुत कम रह गई है। इससेे कर्ज के बोझ से दबे किसान बहुत दुखी हैं। संपन्न किसान धान और बाजरा की फसल से नाउम्मीद होकर फसलों की जुताई कर सरसों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं, जबकि गरीब किसानों के बेटे खेती का आसरा छोड़कर मजदूरी के लिए शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।
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सिंचाई के लिए डीजल की भी मारा मारी
पेट्रोल पंपों पर भी सिंचाई के लिए डीजल की मारा मारी है। किसानों को डीजल के लिए पेट्रोल पंपों पर लाइन लगानी पड़ रही है। कभी-कभी दिन भर पेट्रोल पंप पर लाइन लगाने के बाद भी उन्हें जरूरत के हिसाब से डीजल नहीं मिल पाता है। पेट्रोल पंपों पर किसानों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भी मशक्कत करनी पड़ जाती है।
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