पुलिस की मौजूदगी में बांटी गई खाद
सोमवार को फरीदापुर समिति पर पुलिस की मौजूदगी में 400 एनपीके बांटी गई, जबकि वहां फरीदापुर के अलावा काजरबोझी, समेचीपुर, पेहना, हथिनापुर तथा टॉपर आदि गांवों के करीब 800 किसान लाइन में लगे थे। इसलिए किसानों को सिर्फ एक-एक बोरी दी गई। गुरुगवां समिति में 70-80 बोरी डीएपी शेष है, लेकिन मांग ज्यादा होने के कारण उसका वितरण नहीं किया जा रहा।
यहां भी तैनात रही पुलिस
क्षेत्र में गढ़ियारंगीन साधन समिति में सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में डीएपी वितरित की गई। ग्राम प्रधान लालू प्रसाद ने आरोप लगाया कि सचिव मनमाने ढंग से डीएपी का वितरण कर रहे हैं। कस्बा की साधन समिति, खेड़ा रठ स्थित साधन समितियों पर डीएपी उपलब्ध नहीं थी। किसान खाद नहीं मिलने से मायूस होकर लौट गए। डभौरा समिरा साधन समिति पर सोमवार को 400 कट्टा डीएपी थी। किसानों की अधिक भीड़ होने की वजह से डीएपी का वितरण नहीं किया गया।
किसानों का दर्द
गांव समेचीपुर के किसान मजिस्टर सिंह ने बताया कि जरूरत चार बोरी की है, लेकिन एक बोरी खाद मिल सकी और वह भी डीएपी के बजाय एनपीके की है। लगभग दस दिन बाद समिति पर आई खाद भी जरूरत के अनुसार नहीं मिल सकी। पिपरी कलां के पाल सिंह ने कहा कि गेहूं की बोआई को डीएपी नहीं मिल रही है। बहुउद्देश्यीय समिति पर खाद लेने मैं सुबह ही आ गया था। सचिव का कहना है कि समिति पर डीएपी उपलब्ध नहीं है।
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कटैया निवासी किसान रामनिवास कश्यप ने कहा कि मुझे गेहूं की फसल के लिए यूरिया खाद की आवश्यकता है। मैं समिति पर यूरिया खाद लेने के लिए आया हूं। पहले एनपीके बांटी जा रही है। इसलिए इंतजार कर रहा हूं। बाबूपुर बुजुर्ग उर्फ नगरा के गौतम सिंह ने बताया कि मेरे खेतों में गेहूं की बोआई हो गई है। अब गेहूं की फसल में यूरिया खाद लगानी है। यूरिया खाद के लिए भी कई घंटे तक लाइन में लगना पड़ा।
जिला कृषि अधिकारी विकास किशोर शर्मा ने कहा कि जिन सहकारी साधन समितियों से डीएपी की मांग आ रही हैं, वहां भेजी जा रही है। जिले में पर्याप्त मात्रा में डीएपी और एनपीके है। जहां पर डीएपी नहीं है, वहां के सचिवों से बात करके जल्द ही भेजी जाएगी।