प्रदेश सरकार की फसली ऋण मोचन से लाभान्वित हुए सीधे-साधे किसानों को कर्ज माफी का गोरखधंधा समझ नहीं आ रहा है। योजना के शुरुआती दौर में सिर्फ पांच हजार किसानों को कर्ज मुक्ति प्रमाण पत्र मिल पाए हैं, लेकिन किसानों के स्तर से सरकार की नीयत पर अभी से सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि प्रथम चरण के प्रमाण पत्रों का वितरण पूरा होने के बाद किसानों की सुनवाई कर उनकी आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा।
इस योजना में जिले के एक लाख 19 हजार 223 ऐसे किसानों का चयन किया गया है, जिन्होंने गत वित्त वर्ष से पहले फसली ऋण लिए थे और उसकी देनदारी चुकता नहीं कर पाए हैं। इनमें से 92594 किसान संबंधित बैंक खातों में अपने आधार नंबर फीड करा चुके हैं। पहले चरण में कर्ज मुक्ति प्रमाण पत्र के लिए उन किसानों का चयन किया गया, जिन्होंने आधार फीडिंग में सजगता दिखाई और समय से यह काम करा लिया।
इनमें से केवल पांच हजार किसानों को मुख्यालय पर बुलाकर प्रमाण पत्र दिए गए, पात्रता रखने वाले शेष किसानों को तहसील स्तर पर कैंप लगाकर कर्ज मुक्ति प्रमाण पत्र देने की तैयारी है, लेकिन जो प्रमाण पत्र बंटे, उनसे जुड़े किसानों में इस बात को लेकर असंतोष गहरा रहा है कि बकाया ऋण अधिक होने के बावजूद उन्हें ऋण माफी लाभ बेहद कम मिला। पहले चरण में शामिल करीब दो सौ ऐसे किसान हैं, जिन्हें एक हजार रुपये से कम कर्जमाफी मिली।
योजना से जुड़े प्रशासकीय और बैंक अधिकारियों का तर्क है कि दो साल पहले लिए गए फसली ऋण की आंशिक अदायगी के बाद बीते वर्ष 31 मार्च तक जिन किसानों के खाते में कर्ज की जितनी रकम शेष (एक लाख रुपये से कम) है, केवल उतनी कर्ज माफी देय होगी। उनका यह भी कहना है कि कई अभिलेखों का मिलान करने के बाद कंप्यूटर से माफी योग्य कर्ज की प्रमाण पत्र पर इंट्री में कहीं कोई गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है। इसके बावजूद जिन किसान भाइयों को योजना के संबंध में कोई आपत्ति है तो उसका निस्तारण पहले चरण के सारे प्रमाण पत्र बटने के बाद किया जाएगा।