पुलिस ने मंगलवार को पकड़े गए फर्जी वन दरोगा सतनाम सिंह को बुधवार को जेल भेज दिया है। खुटार के एक व्यक्ति ने सतनाम सिंह और वन विभाग के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर संविदा पर नौकरी दिलाने के नाम पर तीन लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। उसने आरोपियों पर कई अन्य लोगों से भी ठगी करने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि खुटार के तिकुनिया चौराहे के पास गांव बुझिया निवासी सतनाम सिंह खुद को वन दरोगा और जनपद लखीमपुर में तैनाती बताता था। उसने वन दरोगा की वर्दी पहने हुए तमाम फोटो भी सोशल मीडिया पर डाल रखे थे। सतनाम सिंह के फर्जी वन दरोगा बनकर घूमने और लोगों को ठगने की शिकायत उच्च अधिकारियों को हुई तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
थानाध्यक्ष जयशंकर सिंह ने बताया कि उसके पास से वन विभाग की एक सरकारी वर्दी, नेमप्लेट सहित बरामद हुई थी। पूछताछ में सतनाम सिंह ने खुद को फारेस्टर के पद पर तैनात बताया। उसके पास से एक फर्जी नियुक्ति पत्र भी मिला है। सतनाम ने पुलिस को बताया कि उसे नियुक्ति पत्र साबिर अली ने दिया था, जो सेवानिवृत्त वन उपनिरीक्षक हैं और जनपद लखीमपुर के मैलानी कस्बे में रहते हैं। पूछताछ में सतनाम पुलिस को भ्रमित करता रहा और खुद को कभी किशनपुर रेंज तो कभी मैलानी रेंज में तैनात बताता रहा।
कई लोगों से नौकरी के नाम पर की ठगी, दो को हिरासत में लेकर पूछताछ
इसी बीच बुधवार को थाने पहुंचे खुटार के मोहल्ला कोट निवासी रामदास ने सतनाम सिंह, साबिर और इसरार पर वन विभाग में उनके बेटे की संविदा पर नौकरी लगवाने के नाम तीन लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए धोखाधड़ी कर रुपये हड़पने और धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई। रामदास ने पुलिस को बताया कि साबिर और इसरार सेवानिवृत्त फारेस्ट गार्ड हैं। इन लोगों ने उसकी तरह ही कई अन्य लोगों को भी ठगा है। इस पर पुलिस ने उसके दो अन्य साथियों को भी हिरासत में ले लिया, जिनसे पूछताछ की जा रही है। साथ ही सतनाम को बुधवार को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया।
दिखाता था प्रभागीय वन अधिकारी का फर्जी नियुक्ति पत्र
सतनाम सिंह के पास से एपी राय प्रभागीय वन अधिकारी अवध क्षेत्र लखनऊ मंडल की ओर से जारी एक नियुक्ति पत्र मिला है। पत्र एक दिसंबर 2018 को जारी हुआ है। इस नियुक्ति पत्र में सतनाम सिंह को वनरक्षक के पद पर खीरी वन प्रभाग खीरी उत्तरी में तैनात दर्शाया गया है। पुलिस ने डीएफओ खीरी वन प्रभाग उत्तरी के मोबाइल नंबर पर वार्ता की और नियुक्ति पत्र को उनके व्हाटसएप पर भेजा था। डीएफओ ने बताया कि सतनाम सिंह उनके अधिकार क्षेत्र में नियुक्ति नहीं है और एक दिसंबर 2018 को एपी राय नाम के वन अधिकारी भी अवध क्षेत्र लखनऊ मंडल लखनऊ में नियुक्ति नहीं रहे हैं।
नियुक्ति पत्र में तीन नाम, प्रदेश भर में हो सकता है ठगों का नेटवर्क
सतनाम सिंह के पास से एपी राय की ओर से जारी जो फर्जी नियुक्ति पत्र मिला है उसमें तीन लोगों के नाम और नियुक्त किए जाने का विवरण है। सतनाम सिंह के अलावा हरदोई जनपद के बिलग्राम निवासी रामअवध की नियुक्ति वन रक्षक के पद पर उन्नाव वन प्रभाग में दर्शाई गई है। इसी प्रकार सीतापुर शहर निवासी जसपाल सिंह की नियुक्ति रायबरेली वन प्रभाग में लिखी गई है। कहा जा रहा है जब ये नियुक्ति पत्र फर्जी है और इसमें तीन नाम दर्ज हैं तो ठगों का जाल पूरे प्रदेश में फैला हो सकता है।
सतनाम सिंह और साबिर अली आदि फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर वन विभाग की वर्दी पहनकर लोगों को भ्रमित कर धन उगाही करते थे। उक्त ने कई लोगों ने वन विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये ले रखे हैं, जिसकी जांच चल रही है। सतनाम सिंह को पकड़ा गया था। वह फर्जी वन दरोगा बनकर घूमता था। इसके पीछे उसका क्या उद्देश्य था और उसके साथ कितने लोग शामिल हैं, इसकी जांच की जा रही है। जल्द ही अन्य लोग भी जेल भेजे जाएंगे।
- जयशंकर सिंह, थानाध्यक्ष खुटार