एसएस कॉलेज में श्रीराम कथा के समापन पर आरती करते श्रद्धालु व मंचासीन संत विजय कौशल। स्रोत: आयोज
शाहजहांपुर। मुमुक्षु आश्रम में श्रीराम कथा का सोमवार को समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथाव्यास विजय कौशल ने प्रभु श्रीराम के विवाह के प्रसंग को प्रारंभ किया। इस बीच माता सीता की विदाई के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
कथा व्यास ने कहा कि जब श्रीराम ने धनुष भंग कर दिया तो मलय पर्वत पर तपस्या कर रहे परशुराम दौड़े चले आए। उनके हाथ में फरसा एवं आंखों में भयंकर क्रोध था। माता सीता ने भगवान परशुराम को प्रणाम किया। राजा जनक ने उनसे सीता स्वयंवर का प्रसंग कहा। विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम और लक्ष्मण ने भगवान परशुराम को प्रणाम किया। उन्होंने लक्ष्मण जी और भगवान परशुराम संवाद, श्रीराम विवाह और सीता माता की विदाई का प्रसंग भी सुनाया।
कथा में संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद, महामंडलेश्वर हरिहरानंद, स्वामी अभेदानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद सरस्वती, स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती, ज्योतिर्मयानंद सरस्वती, स्वामी गंगेश्वरानंद सरस्वती आदि मौजूद रहे।
छोटा सा बीज आज फलदार वृक्ष : स्वामी चिन्मयानंद
कथा के समापन पर स्वामी चिन्मयानंद ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1964 में संत शुकदेवानंद महाराज का रोपित छोटा सा बीज आज एक विशालकाय फलदार वृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का चरित्र और उनकी कथा भारतीय संस्कृति की आत्मा है।