शाहजहांपुर/परौर। कलान तहसील के अस्तोली गांव में खेत की खोदाई के दौरान मिले कई प्राचीन शिवलिंग और मूर्तियां स्वयं में पूर्व मध्यकाल से मध्यकाल का इतिहास संजोए हुए हैं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास वभिाग के विशेषज्ञों के साथ अस्तोली का दौरा करने के बाद पुरातत्वविद् डॉ. अनूप रंजन मिश्रा का मानना है कि वहां खोदाई से मिले मृद भांड (मिट्टी के पात्रों) के आधार पर की गई काल गणना के आधार पर अस्तोली में मुगलकाल से पूर्व करीब 700 से 800 वर्ष पहले भव्य शिवालय बनाया गया। वहां से प्राप्त हुए शिवलिंग, मूर्तियां और हवनकुंड उसी शिवालय के अवशेष हैं।
बता दें कि अस्तोली निवासी दयाराम ने कुछ दिन पहले अपने ढलवां खेत को समतल बनाने के लिए वहां खोदाई शुरू की थी। टीले वाली जगह पर करीब तीन से चार फीट खोदाई करने पर पहले एक मानव कंकाल निकला। बाद मे उसी स्थान से छह शिवलिंग, पांच हवन कुंड,छोटे-बड़े आकार की 11 मूर्तियां और मृद भांड के भग्नावशेष मिले थे। मूर्तियों पर अस्पष्ट लिपि भी अंकित मिली, जिसे पढ़ा नहीं जा सका। प्राचीन कलाकृतियों वाली मूर्तियां निकलने की सूचना मिलते ही क्षेत्र में चर्चा हुई तो वहां लोगों की भीड़ जुटने लगी और इसी के साथ मूर्तियों की पूजा शुरू कर दी गई।
मामला चर्चा में आया तो रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के विशेषज्ञों की टीम अस्तोली पहुंची और उसने इन सभी वस्तुओं का अध्ययन किया। इस टीम में डॉ. प्रिया सक्सेना और डॉ. कमल दास बिंदु के साथ पुरातत्वविद् डॉ. अनूप रंजन मिश्रा भी शामिल रहे। प्राचीन वस्तुएं देखने के बाद पुरातत्वविद् डॉ. मिश्रा का कहना है कि शिवालय के साक्ष्य मिलने से यह भी स्पष्ट हुआ है कि अस्तोली गांव का अस्तित्व पूर्व मध्य काल से पहले से रहा है। बाद में किन्हीं परिस्थितियों में शिवालय मध्यकाल तक अस्तित्व में रहने के बाद भूगर्भ में समा गया।
मध्यकाल के बाद का निकला मानव कंकाल
पुरातत्वविद् डॉ. मिश्रा के अनुसार खोदाई में पहले मानव कंकाल निकला और बाद में उसी स्थान से शिवलिंग और मूर्तियां प्राप्त हुई। इससे स्पष्ट होता है कि मृत शरीर बाद में दफनाया गया और शिवालय पहले का है। उन्होंने कहा कि कंकाल देखने में अधिक पुराना नहीं है। इसलिए उसे प्राचीन शिवालय से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। ऐसा प्रतीत होता है कि शिवालय भूगर्भित होने के बाद गांव की नई बसावट के लोगों ने वहां जमीन खाली पड़ी देख कोई मृत शरीर दफनाया होगा।
पांचाल संग्रहालय की शोभा बनेंगे मृद भांड
अस्तोली में शिवालय के साथ प्राप्त हुए मृद भांड के दो भग्न अवशेष अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पांचाल संग्रहालय की शोभा बनेंगे। पुरातत्वविद् डॉ. मिश्रा के अनुसार यह मृद भांड संग्रहालय की वीथिका में रखे जाएंगे, जिससे कि प्राचीन इतिहास के विशेषज्ञ और शोध छात्र उनका गहराई से अध्ययन कर सकें। उन्होंने बताया कि मृद भांड की काल गणना उनके बाहरी स्वरूप को देखकर करना संभव है और इसीलिए उनकी कार्बन डेटिंग कराने की आवश्यकता नहीं है।
अस्तौली पहुंची पुलिस, बंद कराईं दुकानें
परौर। खेत की खोदाई के दौरान जमीन से निकले शिवलिंग समेत अन्य मूर्तियों और मानव कंकाल की जानकारी पाकर परौर पुलिस ने रविवार को गांव जाकर मामले की जांच पड़ताल की। इस दौरान वहां सजीं पूजा-प्रसाद की दुकानों को पुलिस ने हटा कर भीड़ कम करने का प्रयास किया, लेकिन सिपाहियों के गांव से जाने के बाद दुकानदारों ने फिर दुकानें लगा लीं और ग्रामीणों ने पूजा अर्चना शुरू कर दी।
अस्तोली का यह मामला बीते दिन मेरी जानकारी में लाया गया है। इस बारे में इतिहास और पुरातत्व के जानकार ज्यादा बेहतर बता सकते हैं। खोदाई वाले स्थान पर निकले मानव कंकाल की जांच कराने के लिए परौर के थानाध्यक्ष को निर्देशित किया जा रहा है।
-रमेश बाबू, एसडीएम कलान