दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार से संचालित क्लस्टर पल्स डिमांस्ट्रेशन स्कीम के तहत सिंधौली ब्लॉक के बबौरी गांव में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से फसल प्रक्षेत्र दिवस आयोजित किया गया। इसा मौके पर हुई कृषक गोष्ठी में किसान राम निवास को मसूर के रिकार्ड उत्पादन के लिए भरपूर सराहना मिली।
राम निवास ने वहां मौजूद कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों को यह बताकर आश्चर्य चकित कर दिया कि उचित बुवाई समय, बुवाई में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल, कीट-रोग प्रबंधन आदि बिंदुओं पर विशेष ध्यान देते हुए इस वर्ष एक एकड़ में करीब 11 क्विंटल मसूर की उपज होने का अनुमान है। किसान रामनिवास के अनुसार तैयार फसल से लगभग 55-60 हजार रुपये आय होने का अनुमान है जबकि लागत केवल 5.5 हजार रुपये आई है।
इससे पूर्व, कृषि वैज्ञानिकों ने अपने विषयों से जुड़ी जानकारी दी। पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. नूतन वर्मा ने मसूर में लगने वाले माटू, इकठा, कॉलर रॉट, शीथ ब्लाइट आदि कीट-रोगों से बचाव के लिए विभिन्न रसायनों की प्रयोग विधि बताई। शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह ने मसूर फसल में पुष्पावस्था के दौरान 0-52-34 अनुपात वाले घुलनशील उर्वरक एनपीके की 1.5 किलो मात्रा प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करने का सुझाव दिया।
इसी क्रम में डॉ. तेज बहादुर यादव, डॉ. सीपी गुप्ता आदि ने भी कृषि के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में विभिन्न गांवों से आए करीब 150 किसानों ने भाग लिया। प्रारंभ में सभी किसानों को मसूर और मटर का प्रदर्शन कराने के लिए प्रक्षेत्रों का भ्रमण कराया गया। मसूर प्रदर्शन में 50 किसानों और मटर के 40 उत्पादकों के खेतों का किसानों को भ्रमण कराया गया।