तहसील क्षेत्र में नदियों के अस्तित्व पर माफिया ने संकट खड़ा कर दिया है। नदियों के किनारे तक जमीन जोत कर उनमें फसल बो दी गई है। राजस्वकर्मियों की सांठगांठ से तहसील भर में यह खेल कई वर्षों से खेला जा रहा है, जिस कारण नदियों की शक्ल नाले से भी गई गुजरी हो गई है। सदानीरायों पर संकट के चलते कई तरह की समस्याएं भी खड़ी हुई है और भविष्य में भी इसके दुष्परिणाम भोगने को मिलेंगे, लेकिन नदियों का नामोनिशान मिटाने पर आमादा लोगों को तो सिर्फ अपने फायदे से मतलब है। उधर, अवैध कब्जा रोकने के जिम्मेदार लोग भी अपनी जेब में बढ़ रहे वजन को ही तरजीह दे रहे हैं।
भैंसी नदी
बंडा क्षेत्र से होती हुई पुवायां के तमाम भूभाग को सिचिंत करने वाली भैंसी नदी पूरी तरह सूख चुकी है। नदी के दोनों किनारों पर अवैध रूप से जुताई कर फसलें खड़ी कर ली गई हैं। कुछ वर्ष पूर्व नदी की धार चलती रहती थी, लेकिन अब नदी पूरी तरह से सूख चुकी है।
गोमती नदी
पीलीभीत जनपद के माधोटांडा के निकली गोमती नदी खुटार, बंडा और पुवायां क्षेत्र के लोगों को तमाम लाभ पहुंचाती है। बंडा क्षेत्र में झुकना नदी भी इसकी सहायक है। कभी नदी के दोनों किनारों पर विस्तृत भूभाग खाली पड़ा था, लेकिन अब शायद ही किसी स्थान पर जगह खाली बची हो। नदी के किनारे तक फसलें बो दी गई हैं। नदी के तमाम भूभाग पर अवैध कब्जा कर माफिया ने सैकड़ों एकड़ भूमि पर कब्जा जमा लिया है।
कठिना नदी
शाहजहांपुर और लखीमपुर की सीमा को निर्धारित करने वाली यह नदी खुटार क्षेत्र से गुजरती है। नदी की जमीन पर कब्जे के चलते गर्मियों की कौन कहे सर्दी के मौसम में भी इसकी धारा थम सी जाती है। यह नदी मैलानी और खुटार रेंज के घने जंगलों के बीच से गुजरती हुई हजारों वन्य पशुओं को पानी के रूप में जीवनदान देती है, लेकिन नदी पर जल संकट के चलते वन्य पशुओं और जंगल पर भी संकट आ खड़ा हुआ है।