राजकीय बाल गृह में बंद नेपाल के दो बाल बंदियों को रिहा कर मंगलवार को नेपाल भेज दिया गया। दोनों नौ महीने से नवादा इंदेपुर बालगृह में बंद थे। नेपाल के चाइल्ड राइट ऑफिसर कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अपने साथ ले गए।
बंदी गृह से रिहा हुआ नेपाल के जिला सिरहा के बुद्धिगांव में रहने वाले 12 वर्षीय राजू पासवान ने बताया कि उसके पिता जीवछ पासवान शराब के आदी थे। इसलिए उसकी मां परमीला उन्हें छोड़कर चली गईं। इसके बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली। इससे राजू अपने चाचा के पास रहने लगा। उसकी चाची खाना खिलाने के बदले में पैसे मांगती थीं। जब चाची कहीं चली जाती थीं तो उसे चाचा चुपके से खाना खिला देेेते थे। चाची से परेशान होकर राजू घर से भागकर काठमांडू पहुंच गया। वहां 25 अप्रैल को आए भूकंप में किसी तरह उसकी जान बच गई। इसके बाद भारतीय लोगों के साथ बस में बैठकर सीतापुर पहुंच गया। यहां से वह ट्रेन में बैठ गया। ट्रेन में उसे रोते देखकर सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र का एक व्यक्ति ने उसे अपने घर ले गया। उस व्यक्ति ने राजू को सेहरामऊ दक्षिणी पुलिस के सुपुर्द कर दिया। सेहरामऊ पुलिस ने उसे 19 मई 2015 को बाल सुधार गृह नवादा इंदेपुर भेज दिया।
रिहा हुए दूसरे बंदी 18 वर्षीय राजन थापा पुत्र गोपाल थाना नेपाल के जिला रूपनदेही के साल झंडी क्षेत्र के गांव वनकटी का रहने वाला है। वह छह साल पहले मां सुमित्रा के डांटने पर घर छोड़कर भारत चला आया था। यहां गाजीपुर पुलिस ने उसे बालगृह में डाल दिया। वहां दो साल बंद रहने के बाद राजन को वाराणसी बंदीगृह भेज दिया गया। वहां से उसे 19 मई 2015 को शाहजहांपुर बंदीगृह लाया गया। उसने बताया कि परिवार में उसके माता-पिता के अलावा बहन बीना हैं।