गेंहू फसल की सिंचाई के दौरान करंट लगने से हुई थी किसान की मौत
फरवरी 2015 का मामला, क्षतिपूर्ति की रकम न्यायालय में जमा करने के आदेश
तिलहर क्षेत्र के गांव कबीरचक में वर्ष 2015 में गेंहू की सिंचाई के दौरान करंट लगने से हुई राजेंद्र की मौत के मामले में स्थायी लोक अदालत ने बृहस्पतिवार को उ.प्र. राज्य विद्युत वितरण खंड प्रथम बाईबाग के अधिशासी अभियंता को 4.67 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के तौर पर मय ब्याज के निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर न्यायालय में जमा करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही न्यायालय में क्षतिपूर्ति जमा होने पर 50-50 हजार रुपये पीड़िता के नाबालिग बच्चों शांति, रीमा, रंजीत कुमार, संतोष, अंशिका को प्रदान कर बैंक में उनके बालिग होने तक अत्यधिक ब्याज वाली स्कीम में फिक्स डिपॉजिट करने आदेश दिया है। शेष क्षतिपूर्ति की धनराशि मृतक राजेंद्र की पत्नी वेदवती को देना होगा। वेदवती को प्राप्त धनराशि में से एक लाख रुपये बैंक में दस वर्ष के लिए फिक्स डिपॉजिट करेगी। शेष बची धनराशि एक लाख सत्रह हजार व सभी ब्याज सहित वेदवती को अकाउंटपेयी चेक के माध्यम से नकद प्रदान करने का आदेश दिया है। वर्ष 2015 में घटना उस वक्त हुई थी, जब 20 फरवरी को दोपहर दो बजे राजेंद्र अपने खेत में गेंहू की फसल में पानी लगा रहे थे, तभी अचानक बिजली का तार टूटकर खेत में गिर गया और करंट फैलने से राजेंद्र की मौत हो गई। घटना के बाद राजेंद्र के परिवार की देखभाल करने वाला कोई नहीं रह गया। बिजली विभाग की लापरवाही को उजागर करते हुए विभाग से 4.80 लाख रुपये वाद व्यय व हर्जा-खर्चा मृतक की पत्नी को दिलाए जाने को कहा गया। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष कमल चौधरी, सदस्य तसनीम कौसर व मनोज कृष्ण मिश्र ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद क्षतिपूर्ति का फैसला सुनाया। मृतक की पत्नी वेदवती की ओर से अधिवक्ता अजय वर्मा ने पैरवी की।