दूसरे चरण के पंचायत चुनाव में मंगलवार को हुई वोटिंग के दौरान पहले से लेकर आखिरी घंटे तक मतदान की रफ्तार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा। दिन में 11 बजे के बाद मतदान प्रतिशत में लगातार तीन घंटे तक गिरावट देख अफसरों के माथे पर भी बल पड़ने लगे, यह जानने को कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? नतीजा यह हुआ कि पहले चरण की तुलना में आज हुए मतदान का प्रतिशत कम रहा। ददरौल ब्लॉक के वोटरों ने उत्साह नहीं दिखाया होता तो मतदान प्रतिशत ज्यादा गिरना तय था।
दूसरे चरण के मतदान में गिरावट के संकेत पहले 60 मिनट में ही मिल गए थे। आठ बजे तक चारों ब्लॉकों में चार से सात फीसदी वोट पड़ सके, जबकि प्रथम चरण में इसी अवधि में पुवायां तहसील के ब्लॉकों में आठ से 11 फीसदी मतदान हुआ था। बावजूद इसके अफसरों की यह उम्मीद बरकरार रही कि दस बजे से मतदान रफ्तार पकड़ लेगा। अगले दो घंटों में यह अनुमान सही साबित हुआ। नौ बजे तक सिर्फ नौ फीसदी मतदान हुआ, लेकिन एक घंटे बाद वोटिंग का ग्राफ बढ़कर 20 प्रतिशत तक चढ़ गया।
सूरज जैसे-जैसे आसमान पर चढ़ा, तपिश और उमस बढ़ने से मतदान प्रतिशत फिर से गिरने लगा। दिन में 11 बजे तक मतदान में सात फीसदी का इजाफा हुआ, जो बीते एक घंटे की तुलना में लगभग तीन फीसदी कम रहा। दोपहर एक बजे सभी ब्लॉकों से बमुश्किल चार से छह फीसदी मतदान की रिपोर्ट मिलने पर कंट्रोल रूम का प्रभार संभाले एसडीएम वंदना त्रिवेदी भी हैरत में पड़ गईं।
उन्होंने अधीनस्थों से मुखातिब होकर सवाल किया कि वोट परसेंटेज इतना गिर क्यों रहा है? इस सवाल का जवाब मतदाता ही बेहतर दे सकते थे, इसलिए नियंत्रण कक्ष में मौजूद डीपीओ धर्मेंद्र मिश्रा, सहायक अर्थ एवं संख्या अधिकारी दिनेश शर्मा, डॉ. अनूप सिंह आदि ने भी एसडीएम से सहमति जताते हुए विस्मय भाव प्रकट किया। इसी स्थिति में एक घंटा और बीत गया, लेकिन दोपहर दो बजे तक चारों ब्लॉकों के मतदान में सिर्फ चार से पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो पाई।
अपरान्ह तीन बजे की रिपोर्ट मिलने पर प्रशासन को थोड़ी राहत महसूस हुई क्योंकि तब तक पिछले घंटे की तुलना में मतदान दो से तीन प्रतिशत बढ़ चुका था। अधिकारियों को लगा कि इसी तरह वोटिंग होती रही तो वोट परसेंटेज का आंकड़ा प्रथम चरण के मतदान प्रतिशत को लांघ जाएगा, लेकिन हुआ उल्टा। शाम चार बजे पता चला कि वोटिंग में दो से तीन प्रतिशत की गिरावट फिर आ गई है। हालांकि, तब तक औसत मतदान 58 फीसदी से अधिक रिकार्ड हो चुका था, फिर भी भावलखेड़ा और कांट ब्लॉक इस आंकड़े को छू नहीं पाए।
ददरौल, मदनापुर ने समझाई
लोकतंत्र की अहमियत
प्रथम चरण की तुलना में मंगलवार को हुए मतदान का प्रतिशत कम रहने के जो भी कारण रहे हों, इतना तय है कि ददरौल और मदनापुर ब्लॉक के मतदाताओं ने लोकतंत्र की अहमियत न केवल स्वयं समझी, दूसरों को भी मताधिकार का महत्व बताने में कोई संकोच नहीं किया। मतदान में यह दोनों ब्लॉक क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे। कांट ब्लॉक तीसरी पायदान पर रहा, जबकि भावलखेड़ा वोटिंग के मायने में दोपहर से शाम तक लगातार पिछड़ने से फिसड्डी साबित हुआ।