शाहजहांपुर। विश्व क्षय रोग दिवस बृहस्पतिवार को है। टीबी के खात्मे के लिए प्रयासरत स्वास्थ्य विभाग इस खास दिन पर 111 बच्चों समेत 1039 टीबी मरीजों को गोद लिया जाएगा। पांच शिक्षण संस्थाएं, छह उद्योगपति और जिला स्तरीय अधिकारी टीबी के मरीजों को गोद लेकर उनके पोषण का ध्यान रखकर स्वस्थ बनाएंगे। इसके लिए पुराने जिला अस्पताल में कार्यक्रम का आयोजन किया।
2025 तक देश से टीबी के रोग के समूल नाश के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा। एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर टीबी मरीजों की तलाश कर रहे हैं। पिछले सप्ताह पांच लाख, 43 हजार, 557 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। लक्षण पाए जाने पर 2087 लोगों के सैंपल लिए। इसके बाद टीबी के 121 नए मरीज मिले हैं। मरीजों के पोषण के लिए उन्हें हर माह पांच सौ रुपये दिये जाते हैं।
उसके बावजूद बेहतर पोषण नहीं होने पर मरीजों को गोद लेने का निर्णय लिया। कोशिश है कि मरीजों के गोद लिए जाने से टीबी की दवा खाने से लेकर पोषण की मॉनीटरिंग भी की जा सकेंगी। अधिकारी बताते हैं कि गोद लेने वाले व्यक्ति को हर मरीज पर सात से आठ सौ रुपये उसके पोषण पर खर्च करना होंगे।
2021 में 7574 टीबी के मरीज मिले थे
गत वर्ष भी बड़े पैमाने पर टीबी के मरीज सामने आए थे। 2021 में 7574 रोगी पंजीकृत किए गए थे। इसमें 142 एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) यानी गंभीर रोगी थे। पिछले वर्ष रोगियों को 82 लाख, 84 हजार रुपये दिए गए थे।
15 प्रतिशत रोगियों में आई गिरावट
पिछले वर्ष जहां बड़े पैमाने पर टीबी के मरीज सामने आए थे। वहीं इस वर्ष अभी तक 15 प्रतिशत तक रोगियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। घर-घर रोगियों की खोज और समय से दवा उपलब्ध कराने पर मरीजों की संख्या कम होने लगी हैं।
दिन पर दिन मजबूत हो रहा क्षय रोग विभाग
वर्षों पहले टीबी के मरीजों को अपना इलाज कराने में काफी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता था। अब व्यवस्था में काफी सुधार हुआ। मरीजों को दवा के साथ रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए 500 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। वहीं उच्च स्तर की मशीनों के जरिये जल्दी जांच भी कर ली जाती है।
जिला स्तरीय अधिकारी विश्व क्षय रोग दिवस पर 1039 मरीजों को गोद लेंगे। टीबी के मरीज को गोद लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति समय-समय पर रोगी मुलाकात करेगा। उसे रोजाना दवा खाने को प्रेरित करने के साथ ही उसके पोषण में कमी को दूर करने का जिम्मा भी दिया जाएगा। -डॉ. सतेंद्र कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी