परिषदीय स्कूलों में सोमवार से शुरू हुई छमाही परीक्षा को फ्री स्टाइल परीक्षा कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि परीक्षा के दौरान स्कूलों में परीक्षार्थियों के आपस में बोलचाल की अनुमति न होने के बावजूद पास-पास बैठे छात्र आपस में बोल-बतियाकर प्रश्नों के उत्तर लिखते हुए नजर आए।
मंगलवार को प्राइमरी वर्ग के छात्रों का प्रथम पाली में हिंदी और द्वितीय पाली में पीटी की परीक्षा हुई। जूनियर स्कूलों के छात्रों की पहली पाली में हिंदी प्रथम और दूसरी पाली में संबंधित कला की परीक्षा हुई। हिंदी की परीक्षा के दौरान भी छात्रों ने एक-दूसरे से पूछने के बाद ही कापियों पर उत्तर लिखे। कुछ स्कूलों के अध्यापकों ने छात्र-छात्राओं के गलत उत्तर लिखने पर उन्हें प्यार भरी डांट लगाने के साथ ही सही उत्तर भी बताने से बाज नहीं आए।
एक शिक्षक को स्कूल में सामूहिक रूप से नकल कराने पर टोका तो वह तपाक से बोले कि कक्षा आठ तक बच्चों को फेल तो कर ही नहीं सकते हैं। इसलिए जैसे पास हो जाएं वही बेहतर है।
परीक्षा के दौरान छात्र उपस्थिति रही बेहतर
छमाही परीक्षा के दौरान एक सकारात्मक बात तो नजर आई, वो यह कि इन दिनों स्कूलों में छात्र उपस्थिति रूटीन से काफी बेहतर हो गई। नगर क्षेत्र के कई स्कूलों में 75 प्रतिशत के करीब भी छात्र उपस्थिति देखने को मिली। स्कूलों में कम आने वाले छात्र-छात्राओं ने भी उत्तर पुस्तिका की खानापूर्ति करने के लिए पूछताछ कर उत्तर लिख डाले।
शिक्षक इसमें पूरी ईमानदारी बरतें। यह बच्चों का ही नहीं बल्कि शिक्षकों का सतत और व्यापक मूल्यांकन है। बच्चे का सही मूल्याकंन करने के लिए परीक्षा लें, जिससे उसका शैक्षिक स्तर समझा जा सके और आगे से उसे मजबूत किया जा सके।
- राजेश कुमार वर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी