जीएफ कॉलेज में चल रहे ‘रेशमी रूमाल तहरीक और शैखुल हिंद मौलाना महमूद हसन’ विषयक नेशनल सेमिनार का समापन हो गया। दूसरे दिन भी शिक्षाविदों ने संबंधित विषय पर शोध पत्र पढ़े।
अंतिम दिन नदवतुल उलूम लखनऊ के मौलाना कफील अहमद नदवी ने कहा कि 1857 के बाद रेशमी रूमाल तहरीक एक बड़ा आंदोलन था, जिसने भारतीय राष्ट्रवाद को नई ऊंचाइयां दीं। यह तहरीक कुछ कारणों से भले ही असफल रही हो, लेकिन राष्ट्रीय चेतना जगाने में इसके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने कहा कि देवबंद और तहरीक की चर्चा इतिहास के पन्नों में वह जगह नहीं पा सकी, जो होनी चाहिए थी। जबकि हिंदुस्तान की आजादी में देवबंद और तहरीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस पर गहन अध्ययन किया जाना चाहिए।
डॉ. सैयद मोहम्मद नोमान ने शैखुल हिंद की शिष्य परंपरा पर तलामज-ए-शैखुल हिंद नामक शोधपत्र पढ़ा। वहीं, डॉ. जीए कादरी ने शैखुल हिंद माल्टा जेल में, डॉ. कौसर जमाल ने दारुल उलूम देवबंद और शैखुल हिंद, डॉ. तनवीर हुसैन ने रेशमी रूमाल तहरीक और उबैदुल्लाह सिंधी, बाबरा खान ने सिल्क लेटर मूवमेंट और असमा तबस्सुम ने हजरत शैखुल हिंद और उनकी तहरीक विषयक शोधपत्र प्रस्तुत किए।
इससे पूर्व डॉ. इशरत अल्ताफ ने तिलावते कुरान से कार्यक्रम का आरंभ किया। प्राचार्य ने मुख्य अतिथि को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। डॉ. मो. साजिद खान के संचालन में हुए कार्यक्रम में संयोजक डॉ. मोहम्मद तैयब ने आभार जताया। आयोजन में डॉ. अब्दुल वहाब, डॉ. अनवर मसूद, डॉ. नवेद अलवी, डॉ. मुर्शिद हुसैन, डॉ. फैयाज अहमद, डॉ. रेहानुर्रहमान, डॉ. अहशन रशीद, डॉ. अब्दुल सलाम, डॉ. सुहेल अख्तर नकवी आदि का योगदान रहा।
आज होगा गन्ना कीट
रोग पर व्याख्यान
जीएफ कॉलेज में बुधवार को पूर्वांह 11 बजे ‘गन्ने के कीट रोग एवं नियंत्रण’ विषयक व्याख्यान का आयोजन किया जाएगा। विभागाध्यक्ष डॉ. जमील अहमद ने बताया कि व्याख्यान के लिए गन्ना शोध परिषद के कीट विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. केपी पांडेय को आमंत्रित किया गया है।