आर्य महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दो दिवसीय नेशनल सेमिनार शुरू हुआ।
इम्पैक्ट ऑफ फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट (एफडीआई) ऑन इंडियन इकोनॉमी विषयक
सेमिनार में मुख्य अतिथि ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी, फारसी
विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो. खान मसूद अहमद ने कहा कि विदेशी फंड
जमा करने के लिए एफडीआई ही एकमात्र स्रोत है। एफडीआई लंबे समय तक चलने वाला
निवेश है, इसलिए एफआईआई की तुलना में यह अधिक भरोसेमंद है।
महाविद्यालय
सभागार में हुए सेमिनार में मुख्य अतिथि प्रो. अहमद ने अपने अनुभव भी साझा
किए। विशिष्ट अतिथि सांसद कृष्णा राज ने कहा कि विदेशी धन और इनके उत्पाद
हमारे देश के कुटीर और लघु उद्योगों को प्रभावित न करें तो वह अधिक हितकारी
साबित होंगे। प्रधानमंत्री मेक इन इंडिया के तहत केवल इतना धन ही चाहते
हैं, जिससे हमारा व्यापार प्रभावित न हो। इस अवसर पर सांसद ने महिला शिक्षा
के उत्थान में भरपूर योगदान देने का आश्वासन दिया।
इससे पूर्व
प्राचार्य डॉ. रानी त्रिपाठी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। डॉ. रुचि
द्विवेदी के संचालन में हुए सेमिनार में स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. अहमद, विशिष्ट अतिथि सांसद कृष्णा राज,
एसएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र, जीएफ कॉलेज के प्राचार्य डॉ.
अकील अहमद और वार्ष्णेय कॉलेज अलीगढ़ के प्राचार्य डॉ. एके तोमर को शाल
ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। प्रबंधक अमितेश अमित ने आभार व्यक्त किया।
इससे
पूर्व सेमिनार का शुभारंभ मां शारदे की प्रतिमा को समक्ष दीप प्रज्ज्वलन
से किया गया। छात्राओं ने वेद पाठ और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर
विभिन्न जनपदों के शिक्षाविद प्रो. नीरज शुक्ला, प्रो. निसार अहमद, प्रो.
एके सरकार, डॉ. राजकमल, डॉ. एनएल शर्मा, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. अब्दुल
वहाब, डॉ. आफताब अख्तर, डॉ. इकबाल, कृषि निदेशक डॉ. राधाकृष्ण यादव के
अलावा प्रबंध समिति के अध्यक्ष त्रिलोकी नाथ पांडेय, प्रबंध त्रिपाठी, रामा
सिंह, कमलेश गुप्ता, सरोज गुप्ता समेत बड़ी संख्या में शिक्षाविद मौजूद
रहे। व्यवस्था में सह संयोजक डॉ. आलोक दीक्षित, डॉ. श्वेता सक्सेना आदि का
सहयोग रहा।