शाहजहांपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आगामी शैक्षिक सत्र से देशभर में स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराना प्रस्तावित किया गया है। संयुक्त प्रवेश परीक्षा का शिक्षाविदों ने स्वागत करते हुए इस व्यवस्था को छात्रहित में बताया है। शिक्षाविदों का मानना है कि इससे छात्रों का न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि पैसों की बचत के साथ भागमभाग भी बचेगी। शिक्षाविद नीट की तर्ज पर होने वाली प्रवेश परीक्षा को महत्वपूर्ण मान रहे हैं और इसे भविष्य के लिए बहुउपयोगी भी बता रहे हैं। हालांकि कुछेक ने यह जरूर कहा कि चूंकि यह प्रवेश परीक्षा कंप्यूटर आधारित बताई जा रही है, इसलिए छात्र-छात्राओं को इसके प्रति जागरूक भी करना होगा। तभी नई व्यवस्था को सफल बनाया जा सकेगा। वैसे भी सरकार ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा का पहला चरण केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए ही निर्धारित किया है। अभी इसमें राज्य विश्वविद्यालय शामिल नहीं किए गए हैं। राज्य के विश्वविद्यालयों में नई व्यवस्था दूसरे चरण में होगी।
छात्रों के समय और पैसों की होगी बचत
एसएस कॉलेज प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार मिश्र का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालयों का वर्गीकरण करते हुए स्नातक कक्षाओं में संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। पहले चरण में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में नई व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। बाद में अन्य विश्वविद्यालयों को जोड़ा जाएगा। संयुक्त प्रवेश परीक्षा का निर्णय बहुत ही सराहनीय है। इससे छात्रों की आपाधापी खत्म होने के साथ पैसों की बचत होगी। सिर्फ कोचिंग संचालक इससे प्रभावित होंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर योग्यता होगी प्रमाणित
आर्य महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कनकरानी का कहना है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा छात्रों के लिए बहुत हितकारी साबित होगी। इससे छात्रों की योग्यता का मूल्यांकन राष्ट्रीय स्तर पर हो सकेगा और वह अपनी योग्यता का प्रमाणित भी कर सकेंगे। एकबार की प्रवेश परीक्षा से छात्रों का यात्रा में होने वाली परेशानी, पैसों की बचत के साथ मानसिक उलझन से भी मुक्ति मिलेगी। साथ ही सभी को समान अधिकार भी मिल सकेगा। यह केंद्र सरकार का बड़ा और सराहनीय कदम है।
छात्रों के सपने पूरे करेगी प्रवेश परीक्षा
जीएफ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनयू खान कहते हैं कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ही एक हिस्सा है। नीट की तर्ज पर होने वाली स्नातक प्रवेश परीक्षा का फायदा सीधे तौर पर छात्रों को ही मिलेगा और यह बहुत जरूरी भी था। इससे उनके समय के साथ अनावश्यक खर्च होने वाली धनराशि की भी बचत होगी और बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ने के सपने भी पूरे हो सकेंगे। यह बहुत अच्छी बात है कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है और आहिस्ता-आहिस्ता समस्याओं का समाधान कर रही है।
कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देना होगा
पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय तिलहर की प्राचार्य डॉ. शहला नुसरत किदवई कहती हैं कि शासन और यूजीसी का संयुक्त प्रवेश परीक्षा का निर्णय काफी हद तक सही है। निश्चित रूप से इसका लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा, लेकिन यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित बताई जा रही है, इसलिए सरकार को कंप्यूटर शिक्षा पर बहुत ध्यान देना होगा। क्योंकि हमारे देश में खासतौर पर यूपी जैसे राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र अभी भी कंप्यूटर शिक्षा से दूर हैं। उन्हें जागरूक करना होगा।