शाहजहांपुर। जिले में दौड़ रहे आधे से ज्यादा ई-रिक्शा ऐसे चालकों के हाथ में हैं जिनके पास लाइसेंस तक नहीं है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से निर्धारित किए गए नियम भी इनकी जेब में हैं। रूट निर्धारित होने के बाद भी यह दूसरे रूटों पर सवारियां और माल ढो रहे हैं। चालकों की लापरवाही लोगों की जिंदगी भी खतरे में डाल रही है।
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परिवहन विभाग के अभिलेखों में करीब 18 हजार ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इससे कहीं ज्यादा सड़क पर दौड़ रहे हैं। नियम के अनुसार, ई-रिक्शा चालक के पास लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस होना चाहिए। बावजूद इसके आधे से ज्यादा चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं है। कई ई-रिक्शा तो 15-16 साल के नाबालिग चला रहे हैं। इनकी लापरवाही से आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। चालक ई-रिक्शा का इस्तेमाल माल ढोने में भी कर रहे हैं। क्षमता से ज्यादा माल लाद लेने के कारण यह इतनी धीमी गति से चलते हैं कि पीछे चल रहे वाहन रेंगने को मजबूर हो जाते हैं। इससे जाम की समस्या खड़ी हो जाती है। सरिया तक लादकर मुख्य सड़कों से गुजरते हैं। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के कार्रवाई नहीं करने की वजह से राहगीरों को दिक्कत उठानी पड़ रही है।
- एलएमवी लाइसेंस धारक ही ई-रिक्शा चला सकता है। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो आकस्मिक चेकिंग अभियान लाकर कार्रवाई की जाएगी। नाबालिग ई-रिक्शा चलाते मिले तो वाहन को सीज किया जाएगा।
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- सर्वेश सिंह, एआरटीओ
एक महीने में परिवहन विभाग का डंपिंग यार्ड पूरा हो जाएगा। मानक पूरे नहीं करने वाले ई-रिक्शों को सीज कर वहीं खड़ा किया जाएगा। - संजय कुमार, सीओ यातायात
शाहजहांपुर में जर्जर ई-रिक्शे में बच्चों को बैठाकर ले जाता चालक। संवाद
शाहजहांपुर में जर्जर ई-रिक्शे में बच्चों को बैठाकर ले जाता चालक। संवाद