तिलहर। सीएचसी पर डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। शासन ने यहां डॉक्टरों के 16 पद स्वीकृत किए हैं, लेकिन अधीक्षक समेत सिर्फ चार डॉक्टर ही तैनात हैं। अन्य संवर्गों में भी कई पद रिक्त होने से पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और डिस्पेंसरी से दवाएं लेने के लिए मरीजों व उनके तीमारदारों की लंबी कतार लग रही है।
सीएचसी पर अधीक्षक डॉ. ओमेंद्र राठौर ज्यादातर प्रशासनिक कार्यों और विभागीय बैठकों में व्यस्त रहते हैं। इसलिए मरीजों के स्वास्थ्य की जांच डॉ. अंशुमान तिवारी, डॉ. ऋतुराज राठौर और डॉ. कमरउज्जमा के जिम्मे है। सामान्य दिनों में ओपीडी में रोजाना 250 से 300 मरीज पहुंचते हैं। इस समय बारिश के बाद जुकाम, बुखार, खांसी आदि मौसमी रोगों का प्रसार होने से ओपीडी में रोजाना लगभग 400 मरीज आ रहे हैं।
सीएचसी पर कोई सर्जन नहीं होने से गर्भवती महिलाओं की ऑपरेशन से डिलीवरी कराने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज से सर्जन बुलाए जाते हैं। यहां उपलब्ध डॉक्टरों पर भी काम का बोझ कई गुना बढ़ गया है। उन्हें ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और पैथोलॉजी की ड्यूटी भी करनी पड़ रही है।
दंत रोग, बाल रोग, हड्डी रोग, महिला रोग विशेषज्ञ सहित आर्थो सर्जन के पद भी खाली हैं। इसीलिए इन रोगों से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
तीमारदारों ने बयां की अपनी परेशानी
चाहरपुर के ब्रजेश कुमार ने बताया कि वह अपने पुत्र विनीत को दांतों की दवा दिलाने सीएचसी पर गए थे। वहां ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं मिलने पर मजबूरन एक प्राइवेट डॉक्टर से दवा ली। बिहारीपुर के प्रमोद कुमार ने बताया कि पत्नी मनीषा की तबीयत ठीक नहीं हाेने पर सीएचसी लेकर गए थे, लेकिन वहां उचित सलाह देने के लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं मिलने पर लौटना पड़ा।
सीएचसी पर डॉक्टरों के 16 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मुझे मिलाकर सिर्फ चार डॉक्टर हैं। सर्जन समेत बाल रोग, हड्डी रोग, दंत रोग और महिला विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण पद काफी समय से रिक्त हैं। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए डॉक्टरों से सभी अनुभागों में ड्यूटी कराई जा रही है। -डॉ. ओमेंद्र राठौर, अधीक्षक, तिलहर सीएचसी