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कोलाघाट पुल शुरू न होने, ट्रॉलियों पर प्रतिबंध से बेरौनक हुआ मेला

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ढाईघाट में बसा तंबुओं का शहर।
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फोटो: 07 एसपीएनपी 20, 21, 22
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कोलाघाट पुल शुरू न होने, ट्रॉलियों
पर प्रतिबंध से बेरौनक हुआ मेला
- ढाईघाट मेला : कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर भी नहीं पहुंच सके कई श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। ढाईघाट मेले के मुख्य पर्व कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर भी श्रद्धालुओं की संख्या बेहद कम रही। शासन स्तर से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर यात्रियों के चलने पर प्रतिबंध लगने और भारी वाहनों के लिए कोलाघाट पुल बंद होने का मेले की रौनक पर प्रतिकूल असर दिख रहा है। मेले में श्रद्धालुओं के नहीं आने से दुकानदार और खेल-तमाशे वाले बेहद परेशान हैं।
लॉकडाउन से पहले ढाईघाट में लगभग पांच किमी क्षेत्र में लगने वाले मेले में मुख्य पर्व की पूर्व संध्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हो जाती थी, जबकि इस बार मेला मैदान खाली पड़ा है। घाटे से बचने को मेले में आए कारोबारी ग्राहकों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कोलाघाट पक्का पुल सिर्फ दुपहिया वाहनों के लिए खुले होने तथा पैंटून पुल भी नहीं बनने से श्रद्धालुओं के आगमन पर अघोषित रोक लग गई है। इस कारण मेले में जिले के सुदूर क्षेत्रों के अलावा अन्य पड़ोसी जनपदों से श्रद्धालु नहीं आ सके।
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गंगा के खादर में लगने वाले इस मेले में जहां शहरों के श्रद्धालु चार पहिया वाहनों से आते थे, वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के आने-जाने को एकमात्र साधन ट्रैक्टर-ट्रॉली ही थे। पिछले दिनों कन्नौज में हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली दुर्घटना में कई लोगों की मौत को गंभीरता से लेते हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली से यात्रा करना प्रतिबंधित कर दिया गया है। इससे मेला बेरौनक हो गया है। हालांकि, रात में मेला परिसर में सजी हुई दुकानें बिजली से जगमग हो रही हैं।
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