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रिमझिम फुहारों से गिरा  तापमान, गर्मी से राहत

Fri, 15 Jul 2016 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर
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बार‌िश - फोटो : शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
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दो दिन से गर्मी और उमस से बेहाल शहर के लोगों को शुक्रवार को दोपहर बाद रिमझिम फुहारों से काफी राहत मिली। बूंदाबांदी के साथ ठंडी हवा चलने से वातावरण में आर्र्दता बढ़ गई और पारा भी गिर गया।
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खास यह है कि जिले की विभिन्न तहसीलों के ग्रामीण अंचल में लगातार बारिश हो रही है, लेकिन शहरी क्षेत्र में छाए बादल गत कई दिनों से बिन बरसे निकले जा रहे थे। यही नहीं दिन में तीखी धूप निकलने से तापमान बढ़ने के साथ ही उमस में भी बढ़ोत्तरी होने लगी थी। शुक्रवार को दिन की शुरुआत धूप निकलने से हुई, लेकिन दोपहर बाद बादल गहराने लगे। 
दोपहर ढाई बजे के बाद रिमझिम फुहारों का सिलसिला शुरू हो गया जो कि लगभग एक घंटे तक जारी रहा। बूंदाबांदी और बारिश से मौसम सुहावना हो गया। 
गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषकसुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर 17 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। उन्होंने बताया कि बरसात होने से दिन के तापमान में करीब दो डिग्री सेल्सियस की कमी आ गई है। उन्होंने बरसात का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।
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बारिश नहीं होने से किसान परेशान
मिर्जापुर। पिछले दो वर्षों से सूखे की मार झेल रहे किसानों को इस वर्ष अच्छी बारिश की उम्मीद थी। वैज्ञानिकों ने भी इस वर्ष सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई थी। किंतु आषाढ़ के महीने में जुते हुए खेतों में उड़ती धूल वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान को झुठला रही है, जिससे किसान बेहद दुखी हैं।
जेठ के महीने में डाली गयी धान की पौध रोपाई से पहले ही सूखे की भेंट चढ़ गई। बारिश नहीं होने से किसान धान की पौध को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। सूखे खेतों में ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, तिल आदि की बुवाई भी नहीं हो सकी है। सूखे में भूगर्भ जलस्तर में आ गई गिरावट से बोरिंग भी पानी नहीं दे रहे हैं।
कभी बाढ़, तो कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश, तो कभी ओलावृष्टि जैसी दैवीय आपदाओं से जूझ रहे किसानों को दो वक्त की रोटी में भी घाटा होने से किसानों का खेती से मोह भंग हो गया है। ठेके या बटाई पर खेती करने वाले अधिकांश छोटे किसानों ने खेती करना छोड़कर मजदूरी के लिए दिल्ली, गुजरात, पंजाब आदि प्रांतों की राह पकड़ ली है। खेती अब केवल बड़े लोगों के लिए धन निवेश करने का साधन बनकर रह गई है।

फिर से जमींदारी प्रथा के बन रहे हैं आसार
मिर्जापुर। प्रकृति की मार से एकबार फिर जमींदारी प्रथा के आसार बन रहे हैं। छोटे किसानों की खेती बिककर गांव के एक दो अमीर परिवारों के नाम पर पहुंच रही है। दो-चार बीघा जोत के किसान खेती बेचकर शहरों में मजदूरी को पलायन कर रहे हैं।
बढ़ते परिवार और बंटती खेती से अब गांव में सीमांत किसानों की संख्या काफी बढ़ गई है। बाढ, सूखा, अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से दो चार बीघा खेती की उपज से किसानों की रोजी-रोटी नहीं चल पा रही है। छोटे किसान अब खेती बेचकर मजदूरी का रास्ता अपना रहे हैं, जिससे धीरे-धीरे खेती गांव एक दो अमीर परिवारों के नाम पर इकट्ठी हो रही है।
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