शाहजहांपुर। गोली लगने से युवक और युवती के मौत के 24 घंटे से ज्यादा बीत गए। न तो पोस्टमार्टम हुआ, न कोई रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस कह रही है उसे तहरीर का इंतजार है। खास यह कि युवक-युवती की हत्या हुई है। इस पर भी उसे शक है। पड़ताल की जा रही है कि कहीं यह आत्महत्या तो नहीं।
आशीष और बंटी हत्याकांड में पुलिस न तो वारदात में प्रयुक्त हथियार बरामद कर सकी है। पुलिस के अनुसार आशीष की जेब से एक कारतूस का खोखा बरामद हुआ है, लेकिन यह कहां इस्तेमाल हुआ है। इसकी जानकारी जांच में सामने आने की बात कह रही है। आशीष घटनास्थल तक कैसे पहुंचा, यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। शुरुआती जांच में मान रही है कि आशीष खुद नोएडा से शाहजहांपुर आया था।
पुलिस दोनों के आत्महत्या या फिर आशीष के पहले बंटी को गोली मारने और फिर खुद को गोली मार लेने के एंगल पर भी जांच कर रही है। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आशीष ने आत्महत्या की तो फिर तमंचा मौके से क्यों नहीं मिला। किसी अन्य के द्वारा तमंचा ले जाने की बात भी गले नहीं उतर रही। शव के पास से तमंचा अगर ले जाया गया होता तो कारतूस भी हटा दिया होता। मगर आशीष की जेब में एक खोखा और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ है। पुलिस के सामने वारदात में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी न होना सबसे बड़ा सिरदर्द है।
सुबूत मिटाने की आशंका
आशीष का फोन भी घटनास्थल से बरामद नहीं हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि किसी ने सुबूत मिटाने की कोशिश की है। आशीष के शव के पास खून नहीं मिला है। जिस पीपल के नीचे आशीष का शव मिला, वहां देवस्थान होने के कारण पक्का चबूतरा बना है, पेड़ के चारों ओर कपड़ा भी बंधा है। ऐसे में खून के धब्बे न मिलना संशय पैदा करता है। हालांकि पुलिस का मानना है कि रात हुई बारिश में खून धुल गया होगा। हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि आशीष को गोली कहीं और मारी गई और बाद में शव यहां डाल दिया गया।
दिनभर होती रही भागदौड़
बताया जा रहा है कि वारदात के बाद कुछ नेताओं के फोन भी पुलिस के पास पहुंचे थे। लखनऊ ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी हालात के बारे में खबर लेते रहे। सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग मामला मैनेज करने में भी लगे हुए हैं। पुलिस के पास किसी पक्ष से कोई तहरीर नहीं दी गई है। जबकि सुबह आशीष के परिजन बंटी के परिजनों पर हत्या का आरोप लगा रहे थे मगर शाम तक तहरीर नहीं दी गई थी। बंटी के परिजनों को पूछताछ के लिए पुलिस ने हिरासत में लिया था मगर बाद में छोड़ दिया।
बकौल कप्तान
एसपी एस. आनंद ने बताया कि बंटी और आशीष का प्रेम प्रसंग कई सालों से चल रहा था। आशीष 15 सितंबर को नोएडा से चला था। इसके बाद वह कटरा में रहने वाले अपने बहनोई के घर रुक गया था। 16 सितंबर की दोपहर वह बहनोई के घर से निकला था। रात करीब साढ़े सात बजे बंटी और आशीष की अंतिम बार फोन पर बात हुई थी। बंटी रात में खाना लेकर मकान की दूसरी मंजिल पर चली गई थी। बंटी की शादी तय होने पर आशीष दो महीने पहले गांव आया था और उसने विवाद भी किया था।
इसके बाद वह वापस चला गया था। आशीष अपने परिजन को फोन कम करता था। वह गांव के रहने वाले एक दोस्त को फोन कर हालचाल लेता रहता था। एसपी ने बताया कि मामले में आत्महत्या का एंगल भी हो सकता है। वारदात के वक्त बंटी के घर पर कोई पुरुष न होने की बात सामने आ रही है। उसके दोनों भाइयों की लोकेशन हरियाणा में मिल रही है। पिता कृष्णपाल भी खेत की रखवाली के लिए गए हुए थे। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।