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डॉक्टरों ने किया स्टैविलमेंट  एक्ट के विरोध में प्रदर्शन

Sat, 30 Jul 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो   शाहजहांपुर।
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ध्‍ारना - फोटो : अमर उजाला
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- मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा 
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 डॉक्टरों ने क्लीनिकल स्टैविलसमेंट एक्ट के विरोध में शनिवार को डॉक्टरों ने आएमए के बैनर तले कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट विजय शंकर दुबे को सौंपा। 
ज्ञापन में क्लीनिकल स्टैविलसमेंट एक्ट को काला कानून बताते हुए चिकित्सकों ने कहा कि इस कानून से जनता और स्वास्थ सेवाओं का बोझ इस तरह बढ़ जाएगा कि निम्न एवं मध्यम वर्ग के लिए इलाज कराना मुश्किल हो जाएगा। प्रदेश में 70 से 80 प्रतिशत अस्पताल बंद हो जाएंगे और केवल कार्पोरेट अस्पताल ही चल पाएंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रवाहित होंगी। इसकी वजह से स्वास्थ्य कैंप और रुलर क्लीनिक भी नहीं खुल पाएंगे। इस कानून के तहत पंजीकृत क्लीनिक और पंजीकृत पर्चे को छोड़कर कहीं दवा नहीं लिख या बांट नहीं सकता है। फ्री कैंप और कोई कागज पर दवा लिखना जुर्म होगा। सरकार इस कानून के तहत जबरन सर्जन से दिल का इलाज और फिजीशियन से हड्डी का इलाज करवाना चाहती है। फाईव स्टार माहौल में बनने से अस्पताल की फीस कितनी ज्यादा होगी यह जनता को समझाना है। प्रदर्शन के दौरान अध्यक्ष डॉ. सोमशेखर दीक्षित, कोषाध्यक्ष, डॉ. रिजवान खान, सचिव संजीव कुमार पाठक, डॉ. वीपी चौधरी, डॉ. विजय पाठक, डॉ. विकास टंडन, डॉ. यूडी कपूर, डॉ. वसीम हसन खान, डॉ. सौरव मिश्रा, डॉ. संजीव कनौजिया आदि शामिल थे। 
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नर्सेेज ने दी दो जुलाई से हड़ताल की चेतावनी 
 राजकीय नर्सेज संघ ने जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को शनिवार को ज्ञापन देकर मांगें पूरी नहीं होने पर दो जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। 
ज्ञापन में बताया गया है कि जिला एवं महिला चिकित्सालय एवं समस्त सीएचसी की नर्सेज ने नर्सिज कैडर की मांगों को लेकर प्रदेश सरकार और केंद्र का न मानना और उनकी उपेक्षा की जा रही है। इसी संबंध में संघ ने फैसला किया है कि दो जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। जिसकी सारी जिम्मेदार प्रदेश सरकार, भारत सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की होगी। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष रूथ कौशल, मंत्री मीरा देवी, रामतारा, ललित मोहन यादव, संदेश कुमार, मीरा नागर, रोजवीना अनीता गुप्ता, रेनू देवी, रीना देवी, मारग्रेट तोमर शामिल थीं। 
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- डॉक्टरों ने नहीं देखे मरीज
पुवायां। रजिस्ट्रीकरण और विनिमय कानून के विरोध में पुवायां के डॉक्टरों ने शनिवार को दोपहर तक ओपीडी नहीं की।
डॉक्टरों की बैठक में डॉ. राजीव पांडे ने कहा कि डॉक्टर विरोधी एक्ट को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। जनविरोधी एक्ट थापे जाने से एकल क्लीनिक बंद हो जाएंगे। सरकार को डॉक्टरों की परेशानी समझनी चाहिए और एक्ट को नहीं लागू करना चाहिए। डॉ. गीता पांडे, डॉ. एसके वर्मा ने भी एक्ट को जनविरोध बताते हुए कहा कि रोगियों का ऑनलाइन ब्योरा रखना संभव नहीं है। तमाम डॉक्टर किराए के भवन में प्रैक्टिस करते हैं, कानून लागू होने के बाद सभी डॉक्टरों को निजी भवन में क्लीनिक चलाना होगा, जो संभव नहीं है।
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