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झाड़ू ले आओ मैं ही सफाई कर देता हूं

Sun, 01 May 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
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झाड़ू ले आओ मैं ही सफाई कर देता हूं 
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यूं तो बीएसए आफिस को कई दिनों से इंतजार था कि डीएम साहब का निरीक्षण होगा, कई बार अफवाह भी उड़ी और बीएसए आफिस को बाहर से चमका भी दिया गया। लेकिन जब डीएम आए तो उन्हें बीएसए आफिस बाहर से तो चमकता मिला लेकिन जब अंदर पहुंचे तो सफाई की पोल खुल गई। डीएम को बड़े बाबू से बोलना पड़ गया मेरे लिए झाड़ू मंगा दो, मैं ही सफाई कर देता है। इसके अलावा डीएम ने बा स्कूल, संसाधन केंद्र, मूक बधिर कैंप, स्काउट गाइड कार्यालय का भी निरीक्षण किया। खामियां बता कर उन्हें दूर करने के निर्देश दिए तो अच्छे कामों पर प्रोत्साहित भी किया। जिला पंचायत कार्यालय स्थित शिक्षा विभाग के डीआई ऑफिस की दुर्दशा देख स्टाफ को सोच बदलने के लिए कहा। इसके अलावा मनमाने और अनैतिक शुल्क वसूलने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ मान्यता निरस्तीकरण की कार्रवाई के लिए बीएसए को निर्देश दिए।
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जिलाधिकारी विजय किरन आनंद पूर्वाह्न करीब 11:40 बजे बीएसए कार्यालय पहुंचे। डीएम को कार्यालय के बाहर की व्यवस्था अच्छी मिली तो बीएसए की तारीफ की लेकिन कार्यालय के अंदर पहुंचे तो अव्यवस्था और गंदगी का आलम दिखा। हर कमरे में निरीक्षण को पहुंचे डीएम ने बाबुओं से फाइल मंगानी शुरू की तो बाबुओं के पसीना छूटने लगा। फाइल न दिखा पाने पर मान्यता पटल के बाबू की जमकर क्लास लगी और चेताया कि मान्यता का एक प्रकरण भी अनावश्यक लटकाया तो कार्रवाई होगी। डीएम को डाक रूम में गंदगी मिली तो डाक रिसीवर को चेतावनी दी कि अगले निरीक्षण में हालत नहीं सुधरा सस्पेंड कर दूंगा। लेखा विभाग की सीढ़ियां चढ़ते कोने में डस्टबिन में पान, पुड़िया की गंदगी, खिड़की पर जाले, टूटे शीशे देखकर डीएम ने कहा मेरे लिए झाड़ू मंगा दो, मैं ही सफाई कर देता हूं। महात्मा गांधी का उदाहरण देकर बताया कि वह पहले अपना घर साफ करते थे फिर देश की सफाई की बात करते थे। लेखा विभाग के एक अंधेरे कमरे में दशकों पुराना रिकार्ड देखकर हैरान हो गए। 
डीएम ने पुराना टाइपराइटर देखकर बीएसए को तत्काल कंप्यूटर की व्यवस्था करने, आफिस के एक कमरे में बने शौचालय को सही कराने और पुरानी खस्ताहाल हो चुकीं अलमारियों को बदलने के लिए कहा। जगह की समस्या बताने पर बीएसए को नए कमरे बनवाने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि यह महत्वपूर्ण विभाग है और इसे प्रदेश में पहले स्थान पर होना चाहिए। 
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दिव्यांगों को प्रोत्साहन, स्काउट्स को शाबासी
बीएसए कार्यालय के बाद डीएम रोटी गोदाम स्थित मूक-बधिर बच्चों के कैंप में पहुंचे। घुसते ही किचन के बाहर टीन शेड के नीचे खाना बनता देख नाराजगी जताई। हालांकि यहां की रोटी चखी तो भोजन की तारीफ भी की। यहां नेत्रहीन बच्चों ने ढोलक की थाप पर उनका स्वागत किया। एक बच्चे ने कहा कि वह उनकी तरह बनना चाहता तो डीएम ने प्रोत्साहित किया कि मुझसे भी अच्छा बनोगे। दिव्यांग बच्चों की व्यवस्था के लिए उन्होंने विनियमित क्षेत्र के जेई और एई को बुलाकर बच्चों के शौचालय, स्नानघर, कमरों और शैक्षिक कक्षों में उच्च क्वालिटी की टाइल्स लगवाने, बीएसए और डीसी सोहन शुक्ला के आग्रह पर तत्काल चार कमरे बनवाने के निर्देश दिए। कहा, बच्चे भगवान का रूप हैं, उन्हें हर संभव सुविधाएं दें। पैसों की कमी नहीं होगी इसलिए क्वालिटी से समझौता न करें। स्काउट-गाइड कार्यालय का निरीक्षण कर डीएम संतुष्ट हुए। जिला स्काउट मास्टर निकहत परवीन और जिला गाइड कैप्टन दपिंदर कौर की प्रशंसा कर कहा कि भविष्य के प्रशासनिक आयोजनों में उनका सहयोग लिया जाएगा। डीएम ने स्काउट-गाइड के जनक पंडित श्रीराम वाजपेयी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पौधरोपण किया। बच्चों से कई तरह गांठें बांधने की जानकारी ली और बाइस्कोप भी देखा।
बा स्कूल में शिक्षिकाओं को पढ़ाया पाठ
डीएम किला स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय पहुंचे। पहले शिक्षिकाओं और जिले के बीईओ को कर्तव्य निष्ठा का पाठ पढ़ाया। इसके बाद पढ़ाई का स्तर जानने के लिए बच्चों की कापियां चेक करके शैक्षिक गुणवत्ता परखी। पूछा कि यहां के बच्चे नवोदय स्कूल के बच्चों जैसे क्यों नहीं बन सकते। बच्चों को नवोदय का सपना दिखाइए। वैसी ही शिक्षा दीजिए। जो सहूलियत मांगेंगे, वे मिलेंगी। उन्होंने टीचर्स से पढ़ाने के लिए कहा और उनके पढ़ाने का ढंग परखा। फिर खुद पढ़ाकर पढ़ाने का तरीका बताया। दिव्यांग बच्चों के लिए कहा कि वे बोल या देख नहीं पाते तो यह अर्थ कतई नहीं है कि उनका कोई अधिकार नहीं है। उनका अधिकार मत छीनिए। बीएसए को निर्देश दिए कि सभी स्कूलों में ब्लैक बोर्ड के बजाय आधुनिक व्हाइट बोर्ड की व्यवस्था करें। बीईओ को स्कूलों के निरीक्षण के टिप्स दिए। कई मामलों में बीइओ को चेतावनी भी दी। यहां भी जेई और एई से फर्श बनवाने, टाइल्स लगवाने, शौचालय, पानी निकासी, छायादार पेड़ों का पौधरोपण करने के लिए। बच्चे जमीन पर बैठे देखे तो फर्नीचर की व्यवस्था तुरंत करने के लिए कहा।
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