रेनू के स्कूल में लगभग तीन सौ छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर बना रखी है। उसके बाद भी दस मिनट विलंब होने पर बीईओ भावलखेड़ा का मन नहीं पसीजा। उन्होंने रेनू समेत 14 स्टाफ को गैरहाजिर कर दिया। उन्होंने बीएसए को स्पष्टीकरण दिया, लेकिन वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई को नहीं हटाया गया।
सात महीने से कार्यालय का चक्कर लगा रही थीं रेनू
रेनू के अनुसार, वह सात महीने से कार्यालय के चक्कर लगाती रहीं। इसके चलते उनकी दो वेतनवृद्धि रुक गईं और जनवरी में लगने वाला चयन वेतनमान से भी महरूम रह गईं। उन्होंने शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों से भी संपर्क साधकर प्रयास कराया। तब भी हल नहीं निकला। इसके चलते वह अवसाद में आ गईं। रेनू ने बताया कि स्कूल में इतनी मेहनत करने के बाद भी कार्रवाई का यह सिला मिलने पर वह हताश और मायूस होकर टूट गईं। फिर खुद को संभाला और भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने का निर्णय किया। तब उन्होंने एंटी करप्शन टीम से संपर्क साधा।
बीईओ मदनापुर ने भी जांच रिपोर्ट में फंसा दिया पेच
गैरहाजिर दर्शाए जाने के मामले की जांच बीईओ मदनापुर को गई। रेनू के अनुसार, उन्होंने भी बिल्कुल विपरीत रिपोर्ट दे दी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बिल्कुल भिन्नता दर्शाते हुए ऐसी टिप्पणी लिखी कि मामला फंस गया।
संविदा कर्मियों के जरिये हो रही वसूली
बीएसए कार्यालय में संविदा कर्मियों के जरिये ही वसूली की जा रही है। इसे लेकर यूटा के जिलाध्यक्ष विनीत गंगवार भी अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सहायक लेखाकार अरुण कलान में तैनात होने के बावजूद उनसे कार्यालय में कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहनता से जांच कराने की मांग की है।
बीईओ भी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके
22 दिसंबर 2025 को बरेली की एंटी करप्शन टीम ने कलान के बीईओ सतीश कुमार व एआरपी सुशील सिंह को पांच हजार रुपये लेते पकड़ा था। दोनों पर शिक्षक डब्ल्यू कुमार से स्कूल से अनुपस्थित दिवस के निस्तारण के लिए धनराशि लेने का आरोप लगा था।