दीपावली से पूर्व धनतेरस पर्व का भी बहुत महत्व है। वैसे तो इस दिन नए बर्तन घर में लाने का चलन है। लोग पुराने घिसे और फूटे बर्तन इसी बहाने बेचकर नए बर्तन घर में लाते हैं, लेकिन अब यह परंपरा शौक में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीण तो इस परंपरा को थोड़ा-बहुत मना भी रहे हैं, लेकिन शहर में बर्तन खरीदने की परंपरा के स्थान पर कोई न कोई वाहन, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, फैंसी आइटम, ज्वैलरी आदि की खरीददारी पर जोर रहता है। साथ त्योहार से संबंधित साजो-सामान आदि की बिक्री भी जमकर होती है। धरतेरस से एक दिन पूर्व ही बाजार में खासी रौनक रही। मुख्य बाजार से लेकर गली-मोहल्लों तक सड़क किनारे दुकानें सज चुकी हैं। कहीं, रंगीन झालरें बिक रही हैं, तो कहीं बिजली से चलने वाले चाइनीज आइटम की भरमार है। सर्राफा बाजार पूरी तरह गुलजार है। छोटे-बड़े सभी शोरूम दूधिया रोशनी से जगमगा रहे हैं। गणेश-लक्ष्मी, दीया-कुचरिया, खील-खिलौने, अगरबत्ती, मोमबत्ती, मिठाई, ड्राईफ्रूट्स की दुकानों पर गजब की भीड़ दिखाई दी।
बर्तनों की दुकानों की तो बात ही दूसरी है। अंदर से बाहर तक स्टील के बर्तनों की भरमार है। बिजली की लाइटों से झिलमिलाते बर्तन हर किसी को आकर्षित कर रहे हैं। रंगीन कागजों के कंदील, आकर्षक झालरें सजावट के लिए बिक रही हैं। कुल मिलाकर बाजार पूरी तरह दिवाली की खुशी में जगमग हो रही है।