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प्रसिद्ध ढाई घाट माघ मेला शुरू, आते ही साधु -संतों ने उठाई ये मांग

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घाटों पर शवदाह के बाद पड़े अवशेष - फोटो : SHAHJAHANPUR
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मिर्जापुर। रविवार से ढाईघाट गंगातट पर करीब 40 दिन तक चलने वाले माघ मेले का शुभारंभ हो गया। इसी के साथ गंगा घाट पर श्रद्धालुओं के साथ साधु-संतों के आने का सिलसिला शुरू हो गया लेकिन गंगा तट की सफाई अभी तक नहीं हो सकी है। घाट के किनारे शवदाह के बाद पड़े अवशेष कल्पवासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। श्रद्धालुओं ने घाट की तत्काल सफाई कराने की मांग उठाई है, जिससे उन्हें स्नान करने में परेशानी का सामना न करना पड़े। वहीं, प्रमुख घाट और आसपास प्रकाश की व्यवस्था और पेयजल के लिए हैंडपंप भी नहीं लग पाए हैं।
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पांच जनवरी से 12 फरवरी तक गंगातट पर चलने वाले इस धार्मिक और ऐतिहासिक मेले का विशिष्ट महत्व है। लेकिन मेले में श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने को जिला पंचायत प्रशासन की हीलाहवाली भारी पड़ रही है।
दस जनवरी पौष पूर्णिमा से गंगातट पर श्रद्धालु कल्पवास शुरू कर देंगे। ऋंगी ऋषि की तपोभूमि ढाईघाट गंगातट पर लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले के संबंध में बताया जाता है कि ऋषि के शाप के कारण नाक पर सींग निकल आया था। नाक पर निकले सींग से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने गंगा के इसी तट पर घोर तपस्या की थी। तब गंगा मइया की कृपा से उनकी नाक पर निकला सींग ढह गया था। तब से इस गंगातट का नाम ढाईघाट पड़ गया। यही वजह है कि इस पवित्र तीर्थ में माघ मास में हजारों संत, महात्मा, श्रद्धालु कल्पवास कर गंगा स्नान करते हैं।
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अधिकारी बोले-
ढाई घाट मेला क्षेत्र के लिए चयनित गंगा के तटवर्ती इलाके में सफाई कार्य अनवरत रूप से चलाया जा रहा है और यह काम सोमवार शाम तक पूरा करा लिया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं।
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- तुलसी राम, प्रभारी, ढाई घाट कैंप कार्यालय, जिला पंचायत
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