कार्तिक गंगा स्नान से पूर्व देवोत्थानी एकादशी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। माना जाता है कि आज के ही दिन भगवान विष्णु चार माह बाद जागृत हुए थे। वह चार माह तक क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर सोते रहे। इसी पौराणिक महत्व को याद करते हुए घरों में चावल के पीठे से चौक सजाकर उसमें भगवान विष्णु के चरण बनाए गए और लकड़ी की पटली से ढककर उन्हें जगाने का उपक्रम किया गया।
घर के बुजुर्गों ने परंपरागत ढंग से गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद, मिष्ठान, फल आदि से पूजा कर विष्णु भगवान का आशीर्वाद लिया। इधर, बाजार में भी एक दिन पहले से ही प्रमुख स्थलों पर बिक्री के लिए गन्ना के ढेर लगने शुरू हो गए थे। इसके अलावा ठेलों पर शकरकंदी, सिंघाड़े आदि सामग्री लगाकर खूब बिक्री की गई। यह भी कहा जाता है कि कार्तिक गंगा स्नान का मेला भी आज के दिन से ही शुरू हो जाता है।