शाहजहांपुर। खिरनी बाग स्थित रामलीला मैदान पर चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिवस शनिवार को कथावाचक रमेश भाई शुक्ल ने चित्रकूट में श्रीराम-भरत मिलन के भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन किया।
कथावाचक ने बताया कि माता कैकेयी के वरदान के कारण प्रभु श्रीराम के वनवास जाने की खबर सुनते ही भरत जी का हृदय मर्मांहत हो उठा। व्याकुल होकर वे समस्त अयोध्यावासियों के साथ वन की ओर दौड़े और चित्रकूट पहुंचे। चित्रकूट में जब भरतजी का प्रभु श्रीराम से मिलन हुआ तो वह प्रभु के चरणों में लोट गए और अश्रुपूरित नयनों से निवेदन किया कि आप लौट चलिए, परंतु प्रभु श्रीराम ने पिता दशरथ की आज्ञा और धर्म की मर्यादा को सर्वोपरि बताते हुए वनवास पूरा करने का संकल्प दोहराया।
इसके बाद वह उनकी खड़ाऊ लेकर लौट आए। कथा के विश्राम पर पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। अखिल भारतीय श्री राम नाम जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित निर्मल शास्त्री, रजनीश दीक्षित, हरिशरण वाजपेयी, दीपक शर्मा, श्रीदत्त शुक्ला, नमित दीक्षित, अजय गुप्ता, नीरज वाजपेयी आदि मौजूद रहे। संवाद
माखन चोरी की लीला वर्णन
जैतीपुर। करकौर गांव के राम मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक पंडित विवेक मिश्रा ने बाल कृष्ण की माखन लीला का प्रसंग सुनाया। उन्हाेंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को माखन बहुत प्रिय था। माता यशोदा उनके लिए रोज ताजा माखन निकालती थीं, किंतु श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ गांव की गोपियों के यहां से माखन चुराकर खाया करते थे। माखन खाते हुए प्रभु श्रीकृष्ण सखाओं को अलौकिक लीलाएं भी दिखाते थे। कथा श्रवण में बाबा अशोक दास, राम सिंह गुर्जर, बालिस्टर, रोशनी, विमला, जबर सिंह आदि शामिल रहे। संवाद