खत्री धर्मशाला घूरनतलैया में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ समारोह एवं संत सम्मेलन में मंगलवार को संतों की उपस्थिति ने गौरवान्वित किया। इस अवसर पर शुक्रतीर्थ के स्वामी भगवत स्वरूपाचार्य ने कृष्ण-अर्जुन वार्ता के अंश सुनाते हुए बताया कि भक्त जो भी प्रतिज्ञा कर लेता है, फिर उसे पूरा करने का काम प्रभु स्वयं अपने ऊपर ले लेते हैं। भक्त को अपने आराध्य पर विश्वास रखना चाहिए।
भगवत स्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि यही कृष्ण ने अर्जुन को समझाया और कहा कि वह सिर्फ अपना कर्म करें, प्रतिज्ञा जरूर पूरी होगी। कृष्ण ने कहा कि मैं अपनी प्रतिज्ञा भले ही त्याग दूं, लेकिन भक्त की प्रतिज्ञा कभी नहीं त्याग सकता। वृंदावन के महामंडलेश्वर प्रणवानंद महाराज ने कहा कि ईश्वर की ओर नहीं आने का स्वभाव पापी का होता है। उसे मालूम रहता है कि यदि ईश्वर की ओर चला गया तो वह अपना रास्ता भटक जाएगा। लेकिन ईश्वर चाहता है कि एक बार पापी भी यदि उसके रास्ते पर आ जाए तो वह उसे भी क्षमा करके सद्मार्ग की ओर ले जाया जा सकता है।
परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद महाराज की अध्यक्षता में हुए संत सम्मेलन में प्रयाग के ओमकार नाथ मिश्र, बृजेश पाठक रामायणी, सत्य त्रियंबकेश्वर महाराज आदि ने भी विचार रखे। इससे पूर्व रमेश त्रिपाठी, प्रसून त्रिपाठी, राम दुलारे त्रिगुणायत आदि ने भजन प्रस्तुत किए। आरंभ में आयोजक कमलेश खन्ना, सरला खन्ना, रागिनी खन्ना, धीरू खन्ना, ओम, राघव, श्याम सुंदर, प्रिया आदि ने संत-महात्माओं का रोली तिलक लगाकर स्वागत कर उनका आशीष लिया।