राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की महिला समन्वय शाखा की ओर से आर्य महिला महाविद्यालय में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज में विशिष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की बेटियां अन्य देशों की तुलना में अधिक संस्कारित और साहसी होती हैं, लेकिन कुछ समय से लिंग भेद के कारण महिलाओं की स्थिति में गिरावट महसूस की जा रही है, जो चिंता का विषय है।
निवेदिता ने कहा कि वर्तमान में महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं। सेना में भी महिलाओं की भागीदारी देश को गौरवान्वित करने वाली है। उन्होंने कहा कि सिर्फ बेटियों पर पाबंदी लगाने से समाज सुधार की बात पूरी नहीं हो सकती, इसके लिए बेटों पर भी अंकुश लगना चाहिए। आज की नारियाें को कहीं से भी कमतर नहीं आंकना चाहिए।
मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री कृष्णा राज ने कहा कि आरएसएस की महिला विंग ने अपनी निष्ठा और कार्यों से सभी जाति-धर्मों में समन्वय स्थापित कर देश को एक बनाने की दिशा में महती भूमिका निभाई है। राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी स्वागत योग्य है। इस अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व प्राचार्य डॉ. रानी त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी श्रद्धा श्रीवास्तव, डॉ. दीपा सक्सेना, अल्पना श्रीवास्तव, अंशू राजानी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर कवयित्री उर्मिला श्रीवास्तव, पूर्व पालिकाध्यक्ष सरोज गुप्ता, डॉ. दीपा सक्सेना, अदिति वाजपेयी, रानी, अंशिका, डॉ. रुचि द्विवेदी, रागिनी चौहान आदि को सम्मानित किया गया। इससे पूर्व संघ के सह जिला संघ चालक कमलेश द्विवेदी ने संगठन के इतिहास पर प्रकाश डाला। डॉ. नमिता सिंह के संचालन में हुई गोष्ठी में जिला प्रचारक राजेश ललित श्रीवास्तव, यतींद्र, विश्वजीत, परमेश चंद्र, सूरज, डॉ. अमित सिंह, पंकेश मिश्र आदि मौजूद रहे।