प्रदेश के संसदीय कार्य एवं नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने आमजनता से चुनाव के दौरान किया वादा निभाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। सरकार बनने के तीसरे दिन शहर पहुंचे खन्ना ने जहां सीवर लाइन प्रोजेक्ट को वरीयता सूची में शामिल बताते हुए जल निगम के एमडी को यहां लाकर इस दिशा में प्रयास तेज कर दिए थे, वहीं शनिवार को जब दूसरी बार शहर पहुंचे तो उनके साथ ईकोग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के एमडी राकेश अग्रवाल थे। एमडी अग्रवाल ने विकास भवन सभागार में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों के सामने कूड़े से बिजली बनाने की मंशा जाहिर करते हुए प्रोजेक्टर के माध्यम से आधुनिक टेक्नालॉजी से अवगत कराया। इस टेक्नालॉजी से शत प्रतिशत कूड़े का निस्तारण करते हुए बिजली तैयार की जा सकती है।
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की विशेषता यह है कि इसके लिए सरकार को कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। बिना किसी अनुदान के मात्र दो एकड़ जमीन शहर में उपलब्ध करानी है, जो डीएम कर्ण सिंह चौहान की प्रेरणा से एसडीएम सदर रामजी मिश्र के प्रयास से मोहल्ला ककरा में उपलब्ध भी कराई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि लखनऊ के बाद शाहजहांपुर ऐसा जनपद है, जहां इस प्रकार का प्रोजेक्ट लगने जा रहा है। वह आमजनता को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराना चाहते हैं, जो आमजनता के साथ उनकी भी मांग रही है।
खन्ना ने बताया कि ईकोग्रीन योजनांतर्गत 45 हजार टन कूड़े से 900 मेगावाट बिजली तैयार की जा सकती है। दो एकड़ जमीन में लगभग 40 करोड़ की लागत से छह माह में ही बिजली बनने लगेगी, जो ग्रिड को मिलेगी। इस तरह कूड़े का निरस्तारण बिजली के रूप में जनता के सामने होगा। नगर विकास मंत्री ने कहा कि कूड़े से बिजली बनाने की योजना जनपद के लिए वरदान होगी।
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प्रतिदिन सौ टन कूड़े से बनेगी बिजली: एमडी
ईकोग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के एमडी राकेश अग्रवाल ने बताया कि कूडे़ से बिजली बनाने की योजना स्वच्छ भारत मिशन की महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे जहां एक ओर प्रतिदिन 100 टन कूड़े से दो मेगावाट बिजली प्रतिघंटा तैयार की जा सकेगी। वहीं कूड़े से बिजली बनाने के बाद बचने वाली राख का उपयोग ईंटों के रूप में किया जा सकेगा।
एमडी श्री अग्रवाल ने प्रोजेक्टर के माध्यम से गैसीफिकेशन टेक्नालॉजी के बारे में उपयोगी जानकारी के साथ बिजली बनाने, कूडे़ के निस्तारण, प्रदूषण आदि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह टेक्नालॉजी पूर्ण रूप से कवर क्षेत्र में काम करती है, जिससे अंडरग्राउंड बिंस तैयार किए जाएंगे, कूड़ा जमीन पर दिखाई भी नहीं देगा। ब्लोअर के माध्यम से इससे प्रक्रिया से उठने वाली दुर्गंध भी समाप्त की जाएगी, जो वायु प्रदूषण दूर करेगी। उन्होंने बताया कि शहर में चार से पांच मेगावाट बिजली कूड़ा से तैयार की जा सकेगी।