जलालाबाद के सोअहम आश्रम में चल रहे सम्मेलन में प्रवचन करते संत। संवाद
- फोटो : नीले मफलर में शिखा व बीच में मां नीलम व पूनम ।
जलालाबाद। अखिल भारतीय सोअहम महामंडल की ओर से संस्था के आश्रम में आयोजित संत सम्मेलन का सोमवार को अंतिम दिन रहा। सोअहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि व्यक्ति चाहे कितना भी धन, सम्मान व पद-प्रतिष्ठा हासिल कर ले, मगर और प्राप्त करने की उसकी तृष्णा समाप्त नहीं होती। यही तृष्णा मनुष्य के दुखों का कारण बनती है।
उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि जितनी भी सांसें मिली हैं, उनको अपनी उन्नति के साथ दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। मनुष्य किसी गरीब का सहारा बने, गो सेवा करे, पात्र व्यक्ति को दान दे और सबके हित के लिए तत्पर रहे। इनका प्रयोग बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा और संस्कार देने में किया जाए, तभी उन्हें सच्ची सुख-शांति मिल सकेगी।
उन्होंने प्रयागराज में 14 जनवरी से 26 फरवरी तक चलने वाले महाकुंभ में ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों से पहुंचने का अनुरोध किया। सम्मेलन में स्वामी प्रीतमदास, स्वामी प्रणवानंद, स्वामी नारायणानंद, स्वामी सच्चिदानंद, स्वामी भागवतानंद आदि संतों ने भी श्रद्धालु श्रोताओं का प्रवचनों के माध्यम से मार्गदर्शन किया। अंत में भंडारा हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस मौके प्रमोद गुप्ता, विनोद गुप्ता, रामगोपाल, गिरजेश कटियार, किरनेश प्रधान आदि आयोजकों ने संतों को माल्यार्पण कर और उन्हें अंग वस्त्र भेंटकर सम्मानित करके विदा किया।