शाहजहांपुर। बारहवीं के बाद परंपरागत पाठ्यक्रम के बजाय तकनीकी शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ गया है। छात्राएं बीए, बीएससी करने के बजाय आईटीआई, जीटीआई, जेएनएम और एएनएम कोर्स को तरजीह दे रहीं हैं। इसका असर डिग्री कॉलेजाें के प्रवेश पर पड़ा है।
आर्य महिला डिग्री महाविद्यालय में कुछ वर्षों पहले तक निगोही, बीसलपुर, रोजा, कांट समेत दूरदराज के ग्रामीण अंचलों से छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आती थीं। उस समय प्रवेश के लिए लाइन लगती थी, भीड़ के चलते प्रवेश मिलना आसान नहीं था, लेकिन वर्तमान समय में कॉलेज में छात्राओं की संख्या कम हो गई है।
तकनीकी शिक्षा के प्रति रुझान होने से छात्राएं परंपरागत पाठ्यक्रम से मुंह मोड़ रहीं हैं। यही वजह है कि शैक्षिक सत्र में कॉलेज की सीटें तक नहीं भर पाईं हैं। सीटों पर नजर डालें तो बीए की 560 में 381, बीएससी में 240 में 151, बीकॉम की 160 में 94 प्रवेश हुए हैं। प्राचार्य प्रोफेसर रुपांशुमाला का दावा है कि प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। प्रवेश के आंकड़ों में सुधार होगा।
अधिक कॉलेज खुलने का भी असर
पूर्व में जीएफ कॉलेज और एसएस कॉलेज के बाद एकमात्र आर्य महिला डिग्री कॉलेज था। अब प्रत्येक ब्लॉक में डिग्री कॉलेज स्थापित होकर छात्राओं के लिए कपाट खोल दिए गए हैं। ऐसे में कॉलेज की विद्यार्थी संख्या में गिरावट आई है।
नई शिक्षा नीति भी बन रही वजह
सरकार की नई शिक्षा नीति भी छात्र-छात्राओं को दुश्वारी में डाल रही है। हर छह महीने में सेमेस्टर परीक्षा होने के चलते शिक्षण कार्य नहीं हो पा रहा है। ऐसे में विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
आयोग से नहीं आ रहे प्रोफेसर, पद खाली
आर्य महिला डिग्री कॉलेज में आयोग से शिक्षकों के नहीं आने से कई पद खाली पड़े हुए हैं। अंग्रेजी, इतिहास और संस्कृत समेत कई पदों पर तैनाती नहीं है। ऐसे में निजी तौर पर शिक्षकों को रखकर कार्य कराया जा रहा है।
कॉलेज काफी ज्यादा होने के साथ ही छात्राएं तकनीकी शिक्षा की तरफ ज्यादा जा रहीं हैं। इसके चलते प्रवेश कम हुए हैं। प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इससे आंकड़ों में सुधार होगा। कॉलेज में 80 प्रतिशत तक उपस्थिति रहती है।
- डॉ.रुपांशु माला, प्राचार्य-आर्य महिला डिग्री कॉलेज
शाहजहांपुर में आर्य महिला डिग्री कॉलेज में छात्राओं को पढ़ातीं शिक्षिका। संवाद