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हताशा व निराशा में न उठाएं कोई भी गलत कदम

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शाहजहांपुर। कोरोना काल में लॉकडाउन के चलते तमाम लोगों की नौकरियां चलीं गईं। लोगों को नौकरी या मजदूरी छोड़कर गांव लौटना पड़ा। लोग इसे लेकर तनाव में थे, लेकिन अपनों के बीच बैठकर जब समस्या रखी तो उसका रास्ता जरूर निकल आएगा। इसलिए हताशा-निराशा में कोई भी गलत कदम उठाने की बात दिमाग में आये तो सबसे पहले अपनों के करीब जाएं। इसको देखते हुए इस वर्ष वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे (विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस) की थीम रखी गई है।
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इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन के अनुसार विश्व में आठ लाख लोग हर साल आत्महत्या करते हैं , यानी हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति की मृत्यु आत्महत्या से होती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की दर 2.4 प्रति लाख जनसंख्या है। यानी एक लाख की आबादी पर लगभग दो लोग आत्महत्या करते हैं, वहीं राष्ट्रीय दर 10.4 प्रति लाख जनसंख्या है।
जनपद के मानसिक स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेंद्र आर्या ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हीन भावना से ग्रस्त है या आत्महत्या करने की सोच रहा है तो वह एक मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। मानसिक अस्वस्थता के कारण ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है। उचित परामर्श और चिकित्सा पद्धति के माध्यम से इसका उपचार किया जा सकता है। कोरोना काल में आत्महत्या की जो खबरें सामने आई हैं वो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि लोगों में इस बीमारी के प्रति डर बहुत अधिक है और बहुत से लोग आर्थिक असुरक्षा से ग्रसित हैं।
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समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं
नंदिनी सक्सेना, मनोचिकित्सक सोशल वर्कर्स का कहना है कि जब व्यक्ति अवसाद ग्रस्त या तनाव में होता हैं तो वह चीजों को वर्तमान क्षण के परिप्रेक्ष्य में देखता है। एक सप्ताह अथवा एक माह के बाद यही चीजें भिन्न रूप में दिखाई देने लगती हैं। जो आत्महत्या करने के बारे में सोचते है, वह मरना नहीं चाहते बल्कि केवल अपनी पीड़ा को मारना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें अकेले उस स्थिति का सामना करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र अथवा किसी सहयोगी से बात कर लेने पर उसका समाधान मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में जनवरी से मार्च 2020 के मध्य राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के ओपीडी में 89 आत्महत्या के केस आये है, जिसमें काफी मामलों में काउंसलिंग के माध्यम से राहत प्रदान की गई है। नंदिनी का कहना आत्महत्या प्रवृत्ति वालों की पहचान आसानी से नहीं कर सकते, लेकिन कुछ असमान्य लक्षण से पीड़ितों की मनोस्थिति के बारे में जाना जा सकता है।
आत्महत्या से पहले के लक्षण
ठीक से नींद न आना, आत्मविश्वास कम हो जाना। ऐसे लोग अपने मनोभावों को व्यक्त करने में भ्रमित रहते हैं। खानपान की आदतों में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में व्यक्ति बहुत कम खाता है या बहुत ज्यादा। आमतौर वे अपने फिजिकल अपियरेंस को लेकर उदासीन हो जाते हैं, उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि वे कैसे दिख रहे हैं। धीरे-धीरे वे लोगों से कटने लगते हैं। कई बार वह खुद को नुक़सान भी पहुंचाते हैं। इस स्थिति में परिवार का योगदान महत्वपूर्ण हो जाता है।
मन में ऐसे विचार आएं तो जीवनशैली में बदलाव लाएं
नोडल अधिकारी के अनुसार जीवनशैली में बदलाव लाएं, ख़ुद पर ध्यान देना शुरू करें, खानपान को संतुलित करें, नियमित रूप से कुछ समय व्यायाम या योग करें। नकारात्मक सोच को दूर करें। सबसे महत्वपूर्ण बात अकेले न रहें, परिवार और दोस्तों के संग रहें, सकारात्मक होकर कार्य करे।
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