बेमौसम बारिश से हुई गेहूं की बरबादी से परेशान किसानों को सूबे की सरकार भी पटखनी देने पर आमादा हो गई है। शासन से वर्ष 2015 के लिए लागू गेहूं खरीद नीति से किसानों पर दोहरी मार पड़नी तय है, क्योंकि इस बार बारिश की वजह से खराब हुए गेहूं का समर्थन मूल्य नहीं देने का फैसला किया गया है। गेहूं उत्पादन में प्रति हेक्टेयर पांच क्विंटल पैदावार घटने की आशंका के बीच सरकार के इस फैसले से किसानों की रहनुमाई करने वाले भी आहत हैं।
बारिश से पहले कृषि विभाग ने जिले में आरंभिक सर्वे करके 11 लाख मीट्रिक टन गेहूं की पैदावार होने का कयास लगाया था, लेकिन बारिश ने इस अनुमान को धो डाला। हालांकि, प्रशासन सिर्फ 25 फीसदी फसली क्षति होने की रट लगाए है। इसे सही मान लिया जाए तो भी पैदावार में करीब तीन लाख क्विंटल की कमी आने की आशंका है। इसके बावजूद शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बारिश के दौरान काला पड़ चुका क्षतिग्रस्त दानों वाला गेहूं क्रय केंद्रों पर किसी भाव नहीं लिया जाएगा। ऐसा गेहूं भी रिजेक्ट कर दिया जाएगा जिसमें विजातीय तत्व ज्यादा होंगे।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने बताया कि इस बार 12 फीसदी तक नमी वाले गेहूं की सरकारी खरीद होगी। इससे अधिक जितनी नमी होगी, उसकी कटौती किसानों से की जाएगी। अर्थात 14 फीसदी नमी वाले गेहूं पर किसानों को दो प्रतिशत कटैती भुगतनी होगी। इसी तरह केंद्र प्रभारियों को भंडारण में देरी और अन्य कारणों से नमी बढ़ने पर उनसे भी कटौती की जाएगी।
155 केंद्रों पर 15 जून तक होगी खरीद
अमूमन गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से 30 जून तक होती है, लेकिन इस बार क्रय केंद्र केवल 15 जून तक प्रभावी रहेंगे। हालांकि, इस बार एक क्रय केंद्र बढ़ाकर 155 क्रय केंद्र खोलने का निर्णय किया गया, लेकिन इससे किसानों को कोई खास राहत नहीं मिलने वाली। आरएमओ के अनुसार एक जुलाई से बारिश का दौर शुरू हो जाने के कारण खरीद अवधि एक पखवाड़ा कम कर दी गई है।
रोजा मंडी में गेहूं की आवक शुरू
गेहूं कटने के साथ मंडियों में पहुंचने लगा है, लेकिन अभी क्रय केंद्रों का कोई पता नहीं है। रोजा मंडी के अभिरक्षक राधेश्याम के अनुसार शुक्रवार को मंडी में करीब पांच सौ क्विंटल नया गेहूं आया। उन्होंने बताया कि मंडी के क्रय केंद्र दो अप्रैल से खरीद शुरू कर देंगे।
नमी पर आधारित कटौती किसानों से अन्याय
‘किसान वैसे ही तबाह हैं। अब सरकार ने नमी पर आधारित कटौती का फार्मूला लागू कर दिया जो कि किसानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार करके बिना कटौती किए किसानोें का गेहूं नहीं खरीदा तो भाकियू खामोश नहीं बैठेगी।’
-गगनदीप माटा, जिला संगठन मंत्री, भाकियू (भानु गुट)