शाहजहांपुर। ऑक्सीजन के अभाव में प्रधान अध्यापक अरुणोदय ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत के बाद पूरा परिवार अब तक सदमे से नहीं उभर पाया है। सबसे बड़ी कसक यह है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी निभाते अरुणोदय की मौत हुई मगर सरकारी सिस्टम ने उनकी सुध नहीं ली।
मीरानपुर कटरा के मोहल्ला कायस्थान निवासी अरुणोदय मिश्रा (52) यूपीएस बंगशान में प्रधान अध्यापक थे। 26 अप्रैल को चुनाव प्रशिक्षण के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। दवा लेने से स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो 29 अप्रैल को मतदान ड्यूटी के लिए खुदागंज ब्लॉक के गांव ओखली स्थित बूथ पर चले गए। मतदान के दौरान ही उनको तेज बुखार आ गया। सेक्टर मजिस्ट्रेट को सूचना देने के बावजूद कोई उनकी सुध लेने नहीं आया। करीब पौने दो बजे दूसरे पीठासीन अधिकारी अशोक कुमार पहुंचे, तब अरुणोदय ड्यूटी से रिलीव हुए। जहां से वह अपने छोटे बेटे निखिल के साथ घर आए। प्राथमिक उपचार से कोई लाभ नहीं हुआ। परिजन उन्हें लेकर बरेली के एक अस्पताल पहुंचे। परिजन के मुताबिक अस्पताल के कर्मचारियों ने गेट के अंदर ही नहीं घुसने दिया। बोल दिया गया कि अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। इसके बाद अरुणोदय को भर्ती करवाने के लिए परिजन ने बरेली और शाहजहांपुर के कई अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। किसी ने भी अरुणोदय को भर्ती नहीं किया और ऑक्सीजन की कमी के कारण 30 मई की शाम को उनका निधन हो गया।
संयुक्त परिवार को पालनहार थे अरुणोदय
प्रधानाध्यापक अरुणोदय मिश्रा का भरापूरा परिवार है। उनके पिता राजपाल शर्मा का साल 2004 में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद अरुणोदय की नौकरी लगी थी। माता कमला देवी 80 वर्ष की हो चुकी हैं। दो छोटे भाई उपेंद्र और शेलेंद्र हैं। दोनों ही भाई प्राइवेट जॉब करते हैं। अरुणोदय खुद चार बच्चों के पिता थे। इनमें दो बेटे व दो बेटियां हैं। छोटे भाई उपेंद्र का विवाह हो चुका है, उनकी पत्नी और दो बेटे व एक बेटी हैं।
शादी लायक हो चुके हैं बेटे और बेटियां
अरुणोदय के चार बच्चों में बेटा प्रेक्षित कुमार (26), बेटी अपूर्वा (25), बेटी अंशिका (22) और निखिल (20) वर्ष का है। कोरोना संक्रमण काल में कुछ सुधार होने के बाद अरुणोदय अपनी बेटी की शादी के लिए सोच रहे थे लेकिन उससे पहले ही उनके हंसते-खेलते परिवार को नजर लग गई। अरुणोदय के छोटे भाई शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि भइया पूरे परिवार की धुरी थे। उनकी मौत ने परिवार को तोड़ कर रख दिया है। सरकार की ओर से मृतक आश्रित को नौकरी और आर्थिक मदद मिल जाए तो काफी राहत मिल जाएगी।