शाहजहांपुर। अमेरिका में अच्छी तनख्वाह पर नौकरी करना भले ही तमाम युवाओं का ख्वाब हो मगर देश और परिवार के प्यार में यह सब छोड़कर शरद स्वदेश लौट आए। एमबीए, होटल मैनेजमेंट में स्नातक, फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा प्राप्त शरद ने विभिन्न शोध संस्थानों से मवेशी पालन में प्रशिक्षण प्राप्त कर डेयरी उद्योग शुरू किया। आज शरद 50 से ज्यादा गाय, भैंस, बकरी पालन कर मुनाफा कमा रहे हैं।
मूलरूप से तिलहर के गांव राजनपुर के रहने वाले शरद गंगवार (35) ग्वालियर से होटल मैनेजमेंट में स्नातक की पढ़ाई करने के बाद कैंपस चयन के जरिये दिल्ली में एक कंपनी में काम करने लगे। यहीं पर उन्होंने एमबीए किया। इसके बाद कंपनी से ऑफर मिलने के बाद वह अमेरिका के लांग आईलैंड शहर, न्यूयार्क चले गए।
शरद ने बताया कि वहां की मशीनी जिंदगी उन्हें रास नहीं आ रही थी। अच्छा रहन-सहन, सैलरी सब था मगर परिवार और अपने लोगों के बगैर दिल नहीं लगता था। 2011 में शिक्षक पिता भगवानदास की मौत के बाद उनका मन अमेरिका से उचट गया। बड़े भाई प्रेमशंकर से प्रेरणा पाकर वह 2014 में अपने गांव लौट आए। छह महीने तक विभिन्न व्यापारों के बारे में सोचते रहे। तभी एक घटना ने उन्हें नई दिशा दी। उनके गांव में स्थित फार्म के पास एक गाय को एक व्यक्ति ले जा रहा था। उन्हें कुछ अंदेशा हुआ तो उन्होंने गाय को अपने पास रख लिया। गाय की सेवा करते हुए डेयरी उद्योग की स्थापना का विचार आया। तब उन्होंने दो अन्य गाय भी पाल लीं। इसके बाद एनडीआरआई, करनाल से डेयरी उद्यमिता का एक शार्ट टर्म कोर्स किया। आईवीआरआई, बरेली के पशुपालन से जुड़े सेमिनारों में हिस्सा लिया। दस साहीवाल नस्ल की गायों से उन्होंने डेयरी उद्योग की शुरुआत की। समिति बनाकर करीब 40 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। धीरे-धीरे गाय, भैंस, बकरी मिलाकर सौ से ज्यादा मवेशियों से दुग्ध उत्पादन का काम कर रहे हैं।