शाहजहांपुर। अपहरण के बाद हत्या के 26 साल पुराने मामले में कल्लू गैंग के सदस्य कुख्यात डकैत देवेंद्र फौजी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। हत्याकांड में शामिल तीन अन्य डकैतों को 21 साल पहले ही यही सजा सुनाई जा चुकी है। कल्लू समेत तीन डकैतों की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
कल्लू यादव गैंग की कई जिलों में दहशत थी। परौर थाना क्षेत्र के गांव मंझा दहिनिया के प्रधान गिरंद सिंह से गैंग की रंजिश चलती थी। गिरंद ने मदनापुर थाने में तहरीर देकर बताया था कि उनका भाई बदनपाल सिंह 12 अक्तूबर, 1999 को अपने मौसेरे भाई केशव सिंह के गांव मोहनियां आया था। रात में भाई बदनपाल, बहनोई रामप्रकाश व केशव बैठक में सो रहे थे। तभी असलहे लेकर आए बदमाशों ने बदनपाल का अपहरण कर लिया था। इसकी सूचना 13 अक्तूबर को केशव ने उसे दी।
केशव ने उसे बताया कि नज्जू, दिनेश, महेश, बुल्ले निवासी गांव मंझा दहिनिया, कल्लू, बच्चन निवासी गांव पूरननगला और देवेंद्र निवासी गांव पटनियां, थाना क्षेत्र बीसलपुर जिला पीलीभीत ने बदनपाल का अपहरण किया है। वे लोग उसे रामगंगा नदी की कटरी में ले गए थे। 14 अक्तूबर को मदनापुर थाने में बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। 28 दिसंबर, 1999 को बदनपाल का शव चचुआपुर गांव के जंगल में गड्ढे के अंदर मिला था। शव का कुछ हिस्सा जानवर खा गए थे।
पुलिस ने विवेचना के बाद नज्जू, दिनेश, महेश, बुल्ले, कल्लू, बच्चन और देवेंद्र के खिलाफ आरोपपत्र अदालत भेजा गया। पुलिस द्वारा आरोपपत्र भेजे जाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से 24 मई 2008 को वाद सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया गया। गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर त्वरित न्यायालय प्रथम के अपर सत्र न्यायाधीश ने देवेंद्र फौजी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
तीन डकैतों को पहले हो चुकी सजा, तीन की मौत
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि बदनपाल सिंह हत्याकांड में सात डकैत शामिल थे। इनमें से नज्जू, महेश और बच्चन को अदालत ने 28 जनवरी, 2004 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। देवेंद्र फौजी उस समय फरार था। 2006 में देवेंद्र फौजी किसी मामले में जेल भेजा गया था, तब पुलिस की सूचना पर अदालत ने फाइल तलब की और उस पर केस चला। बुधवार को देवेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दिनेश, बुल्ले और कल्लू मुकदमे के दौरान पुलिस एनकाउंटर में मारे गए थे।
अदालत से मिल चुकी फांसी की सजा
मार्च, 2024 में फर्रुखाबाद के विशेष न्यायाधीश एंटी डकैती कृष्णकुमार सिंह ने देवेंद्र फौजी को 2005 में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी। उस पर 7.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। देवेंद्र ने जून 2024 में सजा के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।