शाहजहांपुर। करीब दो सप्ताह की भीषण गर्मी के बाद बुधवार रात से अचानक मौसम बदल गया। रात को बूंदाबांदी और कुछ इलाकों में तेज बारिश हुई। बृहस्पतिवार दोपहर तक 13 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिली और धान, गन्ना समेत कई फसलों को फायदा हुआ। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार बारिश होने से फसलों में कीट-रोगों के प्रकोप की आशंका टल गई है। हालांकि जिले के एक-दो इलाकों में बारिश के साथ तेज हवा चलने से धान और गन्ने की फसलें गिर गईं, जिससे पैदावार घट सकती है।
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र ने तीन दिन पहले ही मौसम में बदलाव विशेषकर बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। दो दिन तक बादल सिर्फ मंडराते रहे, लेकिन बरसे नहीं। बुधवार दोपहर भी काली घटाओं ने पूरब दिशा के आसमान की घेराबंदी की, लेकिन बारिश नहीं हुई। इसके बावजूद वातावरण मेें नमी बढ़ने से चली ठंडी हवा शाम से मौसम में बदलाव का संकेत दे रही थी। बुधवार रात करीब 10:30 बजे से महीन बूंदों की फुहार गिरनी शुरू हुई और थोड़ी देर बाद बूंदाबांदी बदल गई। दो घंटे बाद आधी रात से बारिश ने तेजी पकड़ ली।
गुरुवार सुबह छह बजे के बाद बारिश थम गई, लेकिन बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। रात से सुबह आठ बजे तक नौ मिमी बारिश हो चुकी थी। इसके बाद भी दोपहर दो बजे तक महीन फुहारें गिरती रहीं और बाद के छह घंटों में चार मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। धीमी रफ्तार से बारिश होने से महानगर की सड़कों पर जलभराव की स्थिति नहीं बनी, लेकिन निचले स्थानों पर सड़कों के किनारे इकट्ठा गंदगी के ढेर रोड पर फैलने से कीचड़ और फिसलन पैदा हो गई। मौसम खराब होने के कारण सुबह से दोपहर तक अधिकांश लोग घरों में रहे और इससे बाजारों में चहल-पहल भी कम रही।
गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार बारिश का दौर रात में शुरू हो जाने से बीते 24 घंटे की तुलना में न्यूनतम तापमान भी तीन डिग्री घटकर 22.4 डिग्री सेल्सियस रह गया। दोपहर बाद बारिश थमने पर आर्द्रता में चार प्रतिशत की मामूली कमी आई, लेकिन धूप नहीं निकलने से अधिकतम तापमान में 5.5 डिग्री सेल्सियस की कमी आ गई। उनका कहना है कि बीते दिन सुबह से शाम तक बैरोमीटर की रीडिंग सामान्य से दो अंक कम रहने के कारण बारिश के हालात बने, लेकिन गुरुवार को बैरोमीटर सूचकांक सुबह सामान्य से 15 अंक ओर शाम को 26 अंक अधिक रहने से शुक्रवार को सुबह बादल छाएंगे, लेकिन तेज हवा से मौसम सामान्य रहने के आसार हैं।
दलहनी फसलें लेंगी बढ़वार, थमेगी धान कटाई
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. सीपी गुप्ता का मानना है कि गुरुवार को हुई बारिश से खरीफ सीजन में मूंग, उड़द आदि दलहनी फसलें अब तेजी से बढ़वार लेंगी और गन्ना का वजन बढ़ने से आने वाले समय में किसानों को इसका लाभ मिलेगा। धान के कुल रकबा के लगभग 25 फीसदी हिस्से में बोई गईं मध्यम देरी और उसके बाद की पिछैती प्रजातियों का धान भी लहलहा उठेंगी, लेकिन जो धान पक चुका है, उसकी कटाई दो-तीन दिन रोकनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि दलहनी फसलों को अभी पानी की पर्याप्त जरूरत है और इन फसलों के लिए बारिश वरदान साबित होगी। चूंकि, पौधे धुल चुके हैं, इसलिए फसलों में कीट-रोगों के प्रकोप की आशंका भी टल गई है। डॉ. गुप्ता के अनुसार जिन खेतों मेें धान की बालियों पर पेनकिल ब्लाइट (झुलसा) रोग के प्रभाव से छिलका लाल दिख रहा है, उसके उपचार के लिए का सुगामाइसीन 300 मिली अथवा कापर आक्सीक्लोराइड की 300 ग्राम मात्रा 180 लीटर पानी मेें घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करना लाभकारी होगा।
पुवायां तहसील में बारिश और हवा से धान व गन्ने को नुकसान
पुवायां। बुधवार रात से शुरू हुई बारिश बृहस्पतिवार शाम तक रुक-रुक कर जारी रही। आसमान में बृहस्पतिवार शाम तक घने काले बादल रहे। इसे देख किसानों की धुकधुकी बढ़ा दी। पुवायां क्षेत्र में बारिश कम रही है, लेकिन खुटार में ज्यादा बारिश और हवा चलने से धान और गन्ने की फसल गिर गई हैं। फसल गिरने और पानी भर जाने से धान में सड़वा रोग लग जाने की आशंका से किसान परेशान हो चले हैं। गिरे गन्ने का भी वजन कम होने और गन्ने को चूहों के काटने की आशंका बढ़ गई है।