अपने जज्बे और जुनून से अंतर्राष्ट्रीय खेलों में देश की झोली में तीन स्वर्ण समेत कई पदक डालने वाला विकलांग कौशलेंद्र मौजूदा व्यवस्था से जूझकर बेबस दिखाई दे रहा है। फसली नुकसान के चेक पाने के लिए करीब तीन महीनों से तहसील के चक्कर लगा रहा यह खिलाड़ी मंगलवार को तहसील दिवस में यह सोचकर आया कि शायद अधिकारी उसकी विवशता पर तरस खाकर उसकी समस्या को हल करा देंगे, लेकिन संवेदनहीनता के चलते उसे आश्वासन के सिवा कुछ हासिल नही हुआ।
कौशलेंद्र के अनुसार गांव कोना याकूबपुर में स्थित जमीन ही उनके भरण पोषण का जरिया है, लेकिन इस साल अतिवृष्टि के चलते फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। फसली नुकसान की भरपाई के लिए सहायता राशि का चेक देने को लेखपाल द्वारा सुविधा शुल्क देने की मांग की गई, जिसे वह पूरा नहीं कर पाए तो उनकी मात्र 15 सौ रुपये की चेक बना दी गई, जिसे उन्होंने लेने से मना कर दिया। इस मामले की शिकायत करते हुए उन्होंने एसडीएम को बताया कि उसके दो भाइयों को अलग-अलग 12 हजार की धनराशि के चेक दिए गए, जबकि उनके पास ही उतनी ही जमीन है और नुकसान भी बराबर का हुआ है। बावजूद इसके अपना हक पाने के लिए यह विकलांग बराबर तहसील के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे आश्वासन ही अब तक मिलते आ रहे। मंगलवार को भी यहीं हुआ तहसील दिवस के दौरान अधिकारियों ने कहा कि वह कुछ देर रुके, फिर इस मामले को देखेंगे, लेकिन अधिकारियों के जाने के बाद में उनसे कह दिया गया कि उसे 15 सौ की चेक लेकर ही संतोष करना पड़ेगा।
यहां बता दें कि बचपन में एक हादसे में दोनों पैरों से विकलांग हुए कौशलेंद्र की व्हीलचेयर ही जिंदगी बनी हुई है। हालांकि उन्होंने इस अभिशाप को चुनौती देते हुए वर्ष 1981 में जापान में आयोजित हुई व्हील चेयर रेस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन स्वर्ण जीते थे। इसके बाद 1982 में हांगकांग में हुई एशिया पैसेफिक प्रतियोगिता में इस प्रतिभावान ने भाला फेंक में रजत तथा व्हीलचेयर प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया था।