कार सहित शारदा नहर में डूबे गांव अखत्यारपुर के सुमित सिंह का तीसरे दिन भी कोई पता नहीं चल सका है। गोताखोर सहित तमाम लोग नहर में सुमित की तलाश में लगे हुए हैं। बुधवार को खीरी का गोताखोर उमाशंकर सुमित की तलाश करते समय नहर में बह गया। उसे बमुश्किल बचाया जा सका।
गौरतलब है कि गांव लुकमानपुर बहेड़ा निवासी कुलदीप सिंह का 32 वर्षीय पुत्र सुमित सिंह उर्फ सुम्मी किसी काम से गांव अखत्यारपुर की ओर गया था। रात लगभग साढ़े सात बजे वह वापस घर जा रहा था। अखत्यारपुर मोड़ के पास अचानक कार अनियंत्रित होकर शारदा नहर में जा गिरी। नहर पूरी तरह से भरी चल रही है। इस बीच बजाज पॉवर प्लांट से काम कर वापस जा रहे गांव नवदिया बंकी केे गुरमुख सिंह ने नहर के बीच से किसी का शोर सुनी तो वह नहर के पास पहुंचे और देखा कि कार की छत पर खड़ा एक युवक मदद की गुहार लगा रहा था।
गुरमुख सिंह ने सुमित के बताए फोन नंबर पर उसके घर सूचना दी। कुछ ही देर में मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। युवक ने बताया कि वह तैरना नहीं जानता है। भीड़ में शामिल कुछ गोताखोर तेज बहाव वाली नहर में बमुश्किल कार तक पहुंचे और सुमित को रस्से में बांध दिया। नहर के किनारे खड़े लोगों ने रस्से को खींचना शुरू कर दिया। थोड़ी दूर तक खिंचने के बाद अचानक रस्सा टूट गया और सुमित पानी में बह चला। नहर के किनारे खड़े कई वाहनों की लाइट में उसे लगभग सौ मीटर दूर तक बहते देखा गया और बाद में वह नहर में समा गया। रात में ही कई गोताखोरों ने सुमित की तलाश की, लेकिन नहर में पानी बहुत ज्यादा और तेज बहाव होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। मंगलवार सुबह से खीरी जनपद के थाना पलिया के गांव श्रीनगर निवासी रामनक्षत्र, रामदयाल, विजयशंकर, पटवारी और दीनानाथ आदि गोताखोर नहर में सुमित की तलाश कर रहे हैं, लेकिन सुमित का कोई सुराग नहीं लग सका है। मंगलवार को गोताखोरों की मदद से गाड़ी को बमुश्किल बाहर निकाला जा सका था। बुधवार को खीरी के श्रीनगर का गोताखोर उमाशंकर नहर में सुमित की तलाश करते समय तेज बहाव में बह गया। साथी गोताखोरों ने रस्सा फेंककर बमुश्किल उसे बचाया।
शारदा नहर में कहां गायब हो जाते है शव
एक माह में तीन लोग हुए नहर में गायब
पुवायां। शारदा नहर में एक महीने में डूबे तीन लोगों का कोई पता नहीं चल सका है। कई दिन तक तलाश के बाद भी पता नहीं लगने पर लोग नहर में तलाश कर चुप बैठ जाते हैं। बड़ा सवाल है कि आखिर नहर में डूबे लोग कहां गायब हो जाते हैं।
कब कौन हुआ गायब
पुवायां। पहला मामला नौ मई को है। बारिश में फसल खराब होने से परेशान बंडा के गांव मुड़िया छावन निवासी किसान जयराखन ने शारदा नहर के मकसूदापुर पुल से नहर में छलांग लगा दी थी। इसी गांव के धर्मपाल ने जयराखन को शारदा नहर पुल पर बैठे देखा था। धर्मपाल के अनुसार जयराखन ने पहले नहर में डंडा फेंका और बाद में खुद छलांग लगा दी। गोताखोरों ने कई दिन तक जयराखन की तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चल सका।
11 मई को पीलीभीत के कस्बा पूरनपुर निवासी ब्रह्मदत्त शुक्ला के पुत्र चंद्रशेखर शुक्ला उर्फ सोनू बंडा के गांव जमुनिया नवदिया निवासी विमलेश पांडे के साथ बरेली गया था। 11 मई की रात विमलेश गांव बंडा के भांवी पहुंचा। वहां गांव के ब्रजपाल सिंह के घर जाकर उसने बताया कि सोनू को बदमाशों ने पकड़ लिया है। बाद में उसने सोनू के नहर में गिरने की बात कही। परिवार के लोगों को विमलेश की बात पर भरोसा नहीं है। विमलेश को पुलिस जेल भी भेज चुकी है। सोनू का भी अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। जीवित होने की संभावना के चलते उसकी तलाश अब भी जारी है।
29 जून की रात बंडा के गांव अखत्यारपुर निवासी सुमित सिंह कार सहित नहर में जा गिरा। नहर से निकाले जाने के दौरान रस्सा टूट जाने से वह नहर में बह गया। उसका भी अभी तक कोई पता नहीं चल सका है।
नहर के किनारे मिला मगरमच्छ का शव
पुवायां। बुधवार को शारदा नहर के किनारे भांवी पुल के पास एक मगरमच्छ का शव मिला है। सूचना के बाद भी वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों ने मगरमच्छ के शव को कब्जे में लेने और पोस्टमार्टम कराने की जरूरत नहीं समझी है। समझा जाता है कि मगरमच्छ नहर से निकलकर बाहर आ गया और किसी कारण से उसकी मौत हो गई। मगरमच्छ के शव पर कोई जख्म आदि नहीं है।