गांव बड़े हरेवा में निर्वस्त्र करके घुमाई गईं महिलाओं में से एक का कहना है कि ‘अब परदा का करिहैं जब पूरे गांव मा नंगों घुमाइ दओ’। अपना दर्द बयां करते समय महिलाओं के आंसू छलक पड़े। पीड़ित महिलाएं कहती हैं कि वे गांव में बगैर पर्दा किए कभी घर से बाहर नहीं निकली थीं। अब गांव में बड़े बुजुर्गों के सामने क्या पर्दा करेंगी। उनका तो सब कुछ लुट गया। पूरे गांव के सामने उनकी इतनी बेइज्जती की गई कि अब वे खुद से शर्मिंदा हैं। जालिमों ने उन्हें जीते जी मार दिया। अच्छा होता कि व हमें गोली मार देते।
लड़के की मां ने बताया कि उन्हें तो पता भी नहीं था कि उनका लड़का दूसरी बिरादरी की लड़की को अपने साथ ले गया है। सुबह करीब आठ बजे लड़की पक्ष के लोग घर में घुस आए। सभी ने उनको और उनकी जेठानी, देवरानियों को पकड़ लिया। कपड़े फाड़ने लगे। हम लोग हाथ जोड़ कर बख्श देने की गुजारिश करते रहे, लेकिन वे नहीं माने। निर्वस्त्र करने के बाद पूरे गांव का चक्कर लगवाया। मारे शर्म के, हम अपनी आंखें नहीं खोल पा रहे थे। बस दोनों हाथों से शरीर के कुछ अंगों को छिपाने की कोशिश करते रह। निर्वस्त्र करने के बाद गांव में घुमा रहे आरोपी उनके साथ मारपीट भी कर रहे थे। उनके कपड़े कंधे पर रखे डंडों में टांग लिये थे। यही नहीं दबंग उनके शरीर पर लकड़ी छेदते हुए चल रहे थे। फिर गांव के बाहर तिराहा पर एक दुकान के बाहर बैठा दिया। लड़के की मां को बाद में एक कमरे में बंद करके वहां भी पिटाई की, गालियां दीं।
लड़के की ताई ने बताया कि आरोपियों ने उन्हेें पकड़ लिया और उनकी 12 वर्षीय बेटी को भी खींचने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को किसी तरह से आरोपियों से बचाया। बताया कि जब उनके कपड़े नोंचकर फेंके जा रहे थे तो वे अपनी आंखें ऊपर नहीं उठा पा रही थीं। बोलीं, इससे तो अच्छा होता कि वे लोग हमें गोली मार देते। अपने तन को काफी छुपाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों की आंखों में रहम नहीं आया। लड़के की एक चाची ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें दबोच लिया और निर्वस्त्र कर दिया। विरोध करने पर आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। पूरे गांव में अपने चेहरे पर हाथ रखे रहीं। इसके बाद आरोपियों ने रोड पर बैठा दिया। वहां जबरन चेहरे से हाथ हटवाए। लड़के की दूसरी चाची ने बताया कि आरोपियों ने निर्वस्त्र शरीर पर लकड़ी से छेड़खानी की। विरोध करने पर पिटाई करने लगे। गांव में मौजूद आदमी उनके शरीर को घूर कर देख रहे थे। महिलाओं के साथ चल रहे पुरुष उनका मजाक भी उड़ा रहे थे। भगवान जालिमों को कभी माफ नहीं करेगा। लड़के की तीसरी चाची ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें पकड़ लिया। पूरा निर्वस्त्र नहीं कर पाए। किसी तरह से उन्होंने आरोपियों के चंगुल से छूटकर अपनी जान बचाई।
खुद को कमरे में 12 घंटे बंद करके लड़कियों ने बचाई आबरू
आरोपियों ने जब युवक के घर पर हमला बोला और महिलाओं को खींचने लगे तो घर में मौजूद दो लड़कियां अपनी जान बचाने के लिए कमरे में बंद हो गईं। वे 12 घंटे तक कमरे में बंद रही। गर्मी और प्यास से उनका बुरा हाल था, लेकिन वे बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं। पुलिस के आने के कई घंटे बाद दोनों लड़कियां कमरे से बाहर निकलीं। दोनों लड़कियाें के चेहरे पर दहशत साफ झलक रही थी।