शाहजहांपुर/जलालाबाद। बड़ा हरेवा गांव में शनिवार को मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना भुक्तभोगियों के लिए तो कभी न भूलने वाली है ही, चश्मदीद भी जीवन भर इसे अपने जहन से नहीं उतार पाएंगे। बुधवाना रोड से हरेवा गांव को जाने वाले रास्ते के तिराहा पर जिस दुकान के बाहर निर्वस्त्र महिलाओं को बैठाया गया था, वहां पहले से मौजूद बुजुर्गों व अधेड़ उम्र के लोगों ने बचाने की कोशिश की थी। मगर वे सब दबंगई के आगे बेबस हो गए थे। अब ये चश्मदीद बता रहे हैं कि उनमें से कोई सिर झुकाकर आगे बढ़ गया तो किसी ने हिम्मत भी की तो करने पर दबंग उन पर हावी हो गए थे। दिमाग में बदले की भावना ठाने वे लोग उनसे लड़ने पर आमादा हो गए थे।
बड़ा हरेवा के ही रहने वाले 65 वर्षीय मान सिंह की तिराहा पर परचूनी की दुकान है। मान सिंह ने बताया कि उन्होंने महिलाओं को सड़क पर निर्वस्त्र देखकर विरोध किया तो आरोपी उनके ऊपर चढ़ बैठे। बोले, उम्र और कमजोरी की वजह मैंने पीछे हटने में ही भलाई समझी। सड़क के दूसरी तरफ साइकिल पंचर की दुकान चलाने वाले देवेश ने बताया कि सारा माजरा उनके सामने हुआ, मगर महिलाओं और पुरूषों की भीड़ देखकर आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई। देवेश की दुकान पर उस वक्त बैठे पड़ोसी गांव भुड़िया के ऋषिपाल ने बताया कि उन्होंने पांच महिलाओं को निर्वस्त्र देखा तो अपनी नजरें झुका लीं। बोले, भीड़ देखकर मेरी हिम्मत नहीं हुई कि पीड़ित महिलाओं को मदद कर सकें। हरेवा के ही रहने वाले जगपाल सिंह को जब यह पता चला कि महिलाओं को दबंग तिराहा पर ले गए हैं और एक दुकान के सामने बैठा दिया है तो वह वहां पहुंचे। जगपाल ने बताया कि इस बीच कुछ राहगीरों के कहने पर आरोपियों ने महिलाओं के कुछ कपड़े वापस कर दिए। महिलाएं और दबंग आरोपी निर्वस्त्र महिलाओं के साथ अभद्रता करते रहे, लेकिन कोई भी उन्हें छुड़ाने की हिम्मत नहीं कर सका। वहीं इस बीच सड़क से लगातार लोगों गुजरने का सिलसिला चलता रहा, मगर सब महिलाओं को निर्वस्त्र देखकर आगे बढ़ते गए। लोगों का कहना है कि इस घटना से बड़ा हरेवा गांव कलंकित हो गया है और चश्मदीद बने लोग कभी इस घटना को नहीं भूल पाएंगे।
विकलांग पोखे बचाने की कोशिश की तो दे दिया धक्का
पीड़ित परिवार से संबंध रखने वाले पोखेलाल एक पैर से विकलांग हैं। वह डंडे के सहारे चलते हैं। जब महिलाओं पर हमला बोला गया तो पोखेलाल ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन दबंगों ने पोखेलाल की पिटाई करते हुए धक्का दे दिया। पोखेलाल ने बताया कि वह अपनी नजरों के सामने परिवार की महिलाओं को बेइज्जती होते देखता रहा, लेकिन असहाय होने की वजह से वह उनकी कोई मदद नहीं कर पाया।
नाउ तो हमारो हवलदार है लेकिन हम चाहिउ के कछू नाइ करि पाये
हवलदार, बस नाम ही है, पेशा नहीं। तेली समाज का यह व्यक्ति गांव में पहुंचे मंडलायुक्त तथा डीआईजी द्वारा आरोपी पक्ष की महिलाओं से की जा रही पूछताछ के दौरान वहां खड़ा था। अचानक डीआईजी की नजर उस पर पड़ी तो उन्होंने उसे बुलाया और पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है और गांव में कल जो हुआ, उस समय क्या तुम मौजूद थे। भीड़ से निकलकर आगे आए उस ग्रामीण ने बड़ी ही मासूमियत के साथ तपाक से जवाब दिया कि नाउ तो हमारो हवलदार है साहब, लेकिन सब कछू देखन के बादौ हम कछू नाइ करि पाये। डीआईजी बोले ऐसा क्यों ? बोले वै कइयौ लोग थे, अगर बचाउन जाते तौ का उनसे मार खाते। हवलदार के इस जवाब में दबंगई का पूरा चित्रण था।
गाड़ी की आवाज तोड़ रही थी गांव का सन्नाटा
बड़ा हरेवा में महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने की शर्मसार घटना के दूसरे दिन रविवार को भी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। जिसे वहां पहुंचने वाली नेताओं और अधिकारियों की गाड़ी की आवाज ही तोड़ रही थी। पुलिस और पीएसी के जवानों की मौजूदगी के बाद भी पीड़ित परिवार की महिलाओं और उनके बच्चों के चेहरों पर शनिवार को उनके साथ हुए जुल्म का खौफ साफ नजर आ रहा था। वहीं कार्रवाई हो जाने से सहमे आरोपियों के घरों पर ताले लटक रहे थे। यहीं नही, गांव के अधिकांश घरों में महिलाएं और पुरूषाें की जगह केवल बच्चे ही मौजूद थे। गांव के लोगों से घटना के बारे में जानने की कोशिश की जा रही थी तो वह दबंगों के खौफ से कतरा रहे थे।