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ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के विरोध में ट्रांसपोर्टरों का हंगामा

Sun, 02 Aug 2015 11:58 PM IST
रोजा।
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परिवहन विभाग में बिना कामर्शियल पंजीयन कराए सड़कों पर भार वाहन के रूप में दौड़ रहे तमाम ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के विरोध में ट्रांसपोर्ट यूनियन के पदाधिकारियों ने रविवार की दोपहर रोजा मंडी गेट पर हंगामा कर प्रदर्शन किया।
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चार दिन में दूसरी बार इस हंगामे के बाद भी परिवहन विभाग और जिला प्रशासन की नींद नहीं खुली है। इतना ही नहीं ट्रैक्टर ट्रॉलियों के भार वाहन के रूप में उपयोग होने से हर साल सरकार को लाखों रुपये की क्षति भी उठानी पड़ रही है।
जनता ट्रक स्वामी वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने रोजा मंडी स्थित कार्यालय पर एक बैठक की। इसमें महामंत्री मो. आसिफ ने मंडी, रेलवे साइडिंग, पड़ोसी जिलों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भार वाहन के रूप में प्रयोग होने का कड़ा विरोध किया गया। सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि एक सप्ताह के अंदर यदि परिवहन विभाग के कामर्शियल पंजीयन कराए बिना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भार वाहन के रूप में प्रयोग बंद नहीं कराया गया तो 10 अगस्त के बाद चक्का जाम की रणनीति अपनाई जाएगी।
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बता दें कि 29 जुलाई को रोजा साइडिंग में सीमेंट की अनलोडिंग का काम इसी तरह के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कराया गया था। इसमें ट्रांसपोर्टरों ने हंगामा काटा था और व्यापारियों ने बाद में उनसे समझौता कर ट्रकों से माल लोड अनलोड कराने के रेट निर्धारित कर लिए थे।
ट्रांसपोर्टर खालिद का आरोप था कि रोजा मंडी में धड़ल्ले से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग किया जा रहा है। प्रदर्शन करने वालो में हरेंद्र सिंह, साजिद खां, आशिक अली, जाहिद खां, रामकिशोर दीक्षित, शफक जनरल, अमर गुप्ता, मीनू बाजपेयी, विश्वमोहन, सीबू मियां, मुन्ना आदि शामिल रहे।

ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग कृषि कार्य के लिए होना चाहिए, लेकिन रोजा के आसपास करीब दो सौ से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भार वाहन के रूप में उपयोग हो रही है। इसका असर ट्रांसपोर्टरों पर पड़ रहा है, इसे बंद कराया जाना चाहिए नहीं तो हम आंदोलन करने को बाध्य होंगे।  
- जगतबंधु रघुवंशी, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन

ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भार वाहन के रूप में उपयोग करना अवैध और एमवी एक्ट में अपराध भी है। इसके लिए परिवहन विभाग को छापेमारी कर जुर्माना वसूलना चाहिए। हम कांवड़ यात्रा से निपटने के बाद इस पर कार्रवाई करेंगे।
- मो. इश्त्यिाक, टीएसआई शाहजहांपुर

हम अभी आउट आफ स्टेट हैं। कितने ट्रैक्टर-ट्रॉली भारवाहन के रूप में पंजीकृत हैं नहीं बता सकते हैं। चार अगस्त को लौटने के बाद इस पूरे मामले को देखूंगा।
- एके मिश्रा, एआरटीओ, प्रर्वतन

ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से हर साल लगता है सरकार को लाखों का चूना
भार वाहन के रूप में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के उपयोग से सरकार को सलाना लाखों रुपये का चूना लग रहा है। जानकार बताते हैं कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को कामर्शियल कराने पर प्रति तिमाही 3150 रुपये का रोड टैक्स, पांच सौ रुपये का फिटनेस और नौ हजार रुपये प्रति पांच साल के लिए परमिट के रूप में सरकार को मिलता है। क्षेत्र में करीब दो सौ से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग भार वाहन के रूप में किया जा रहा है। कुल मिलाकर सरकार को टैक्स के रूप में लाखों के राजस्व हानि के अलावा आउट डेटेड हो चुके ट्रैक्टर ट्रॉलियों के सड़क पर से दौड़ने से दुर्घटना का ग्राफ भी बढ़ा है।
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