बड़े हरेवा में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की घटना के तीन दिन बाद भी
पीड़ित परिवार के घर चूल्हे नहीं जले हैं। प्रशासन की तरफ से पीड़ित
परिवार को खाने के पैकट बांटे गए। इसके साथ ही तमाम संगठनों के लोग सोमवार
को पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे, लेकिन पीड़ित महिलाओं के चेहरों
से खौफ कम होता दिखाई नहीं देता है।
घटना के बाद से पीड़ित परिवार
बदतर हालत में पहुंच गया है कि उनके घरों में पिछले तीन दिनों से चूल्हे तक
नहीं जल सके हैं। इसके पीछे उनकी मुफलिसी भी है। सोमवार को तहसीलदार ओमकार
नाथ वर्मा ने पीड़ित परिवार की महिलाओं और बच्चों के लिए खाने के पैकेट की
व्यवस्था की। उधर, सोमवार को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सत्यभान सिंह
भदौरिया के नेतृत्व में गांव पहुंचे पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित
महिलाओं से मुलाकात कर उनके साथ हुये दुर्व्यवहार की जानकारी ली। इस संबंध
में भदौरिया ने बताया कि घटना की पूरी रिपोर्ट सांसद कृष्णाराज को दी
जायेगी और उनके निर्देशानुसार अगली कार्रवाई तय होगी। प्रतिनिधि मंडल में
पंकज मिश्रा, नीरज पाठक, रामबरन, सत्यपाल चौहान आदि शामिल थे।
पीड़ितों के घरों में दरवाजे तक नहीं
जलालाबाद।
गांव बडे़ हरेवा की पीड़ित परिवार काफी गरीब है। परिवार में बच्चों समेत
34 सदस्य हैं, जबकि खेती के नाम पर इनके पास कुल सात बीघा जमीन है। जिसके
चलते इस परिवार के पुरुष ईंट-भट्ठों पर मजदूरी करके गृहस्थी का पालन पोषण
करते हैं। परिवार में एक महिला के पति की करीब चार साल पहले मौत हो चुकी
है, उसके पांच बच्चे हैं, जबकि दूसरी महिला के छह बच्चे हैं और पति विकलांग
है। तीसरी पीड़िता का पति एटा में ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता है। उसके पति
को घटना के बारे में जानकारी भी नहीं हैं। वहीं सभी पीड़ितों के परिवार के
लोगों को सही तरीके से सिर छुपाने को छत तक मयस्सर नहीं है। घटना वाले दिन
आरोपी बिना दरवाजों वाले मकान में धड़धड़ाते हुए घुस आए थे और महिलाओं को
खींच ले गए थे। घटना के बार पीड़ित परिवार को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने
लगी है। इस परिवार के दो पुरुष सदस्य कहते हैं कि अभी तो गांव में पुलिस
लगी हुई है, लेकिन मामला शांत होने के बाद पुलिस हट जाएगी। इसके बाद
आरोपियों के परिवार वाले भी गांव में लौट आएंगे, तब उनके उन्हें आरोपियों
के परिवार वालों से खतरा बना रहेगा। उनका कहना है कि अगर प्रशासन किसी
दूसरे गांव में जमीन दिलवा दे तो वह गांव छोड़ देंगे। बोले, वैसे भी उन
लोगों की इज्जत की नीलामी होने के बाद गांव में रहने का कोई मतलब नहीं है।
पीड़ितों को बांटे सहायता के राशि चैक
सोमवार
को एडीएम प्रशासन एसके उपाध्याय ने अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण
योजना के तहत स्वीकृत 90-90 हजार की धनराशि के सहायता राशि चेक पांचों
पीड़ित महिलाओं को वितरित किए। इस दौरान एसडीएम भरत लाल सरोज, तहीलदार
ओमकार नाथ वर्मा के अलावा कई अधिकारी मौजूद रहे। इससे पहले तहसीलदार ने
पीड़ित महिलाओ के लिये शासन द्वारा स्वीकृत एक एक लाख की धनराशि उनके खातों
में भिजवाए जाने के लिए बैंकों में खाते खुलवाए गए।