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किशोर ने सौतेले भाई को गोली मारकर उतारा मौत के घाट

Tue, 28 Jun 2016 12:15 AM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
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किशोर ने सौतेले भाई को गोली मारकर उतारा मौत के घाट
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 मामूली विवाद में 15 वर्ष के एक किशोर ने अपने सौतेले बड़े भाई की सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी और थाने पहुंचकर जुर्म का इकबाल कर लिया। पुलिस ने रात में ही मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर सोमवार को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। गांव जमुनिया खानपुर निवासी मूलचंद्र वर्मा ने बताया कि उनका 15 वर्षीय पुत्र 25 जून को बाइक से पुवायां की बाजार गया था। पुवायां में पुलिस ने चेकिंग के दौरान कागजात नहीं होने के कारण बाइक का चालान कर दिया। रविवार को इसी बात पर उन्होंने फटकार लगाते हुए बिना बताए कहीं भी बाइक नहीं ले जाने की चेतावनी दी थी। यह बात नागवार गुजरी। वह पिता से भिड़ गया और गाली गलौज करते हुए मारपीट पर उतारू हो गया। सौतेले बड़े भाई 22 वर्षीय दिलीप ने अनिल की करतूत पर फटकार लगाते हुए उसे पीट दिया। अनिल बड़े भाई की पिटाई से बेहद खिन्न हो गया। रविवार शाम परिवार के लोग भोजन करने के बाद सोने चले गए। दिलीप भी छत पर जाकर सो गया। उधर बदले की आग में जल रहा अनिल भी भाई के पास दूसरी चारपाई डालकर लेट गया। रात लगभग ढाई बजे वह नीचे आकर पिता की लाइसेंसी बंदूक उठा ले गया और दिलीप की कनपटी से सटा कर गोली मार दी। दिलीप की मौके पर ही मौत हो गई। फायर की आवाज होते ही घर के अलावा मोहल्ले के लोग भी जाग गए। लोगों ने बदमाश होने की आशंका में शोर मचाना शुरू कर दिया। इसी बीच आराोपी बंदूक मौके पर फेंककर भाग निकला। उसने रात में ही बंडा थाने पहुंचकर पुलिस को बताया कि वह भाई दिलीप की हत्या कर आया है। पुलिस को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन एसओ राजेश सिंह रात में ही अनिल के घर पहुंचे। छत पर दिलीप का रक्त रंजित शव पड़ा मिला। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाया। उधर जवान बेटे का शव देखकर पिता मूलचंद्र बेहोश हो गए और छत से नीचे आ गिरे, जिससे वह गंभीर घायल हो गए। एसओ राजेश सिंह ने बताया कि आरोपी खुद थाने आ गया था। मृतक के मामा गांव मुड़िगवां निवासी प्रकाश की ओर से हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।  
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डॉक्टर बनना चाहता था दिलीप
 मृतक दिलीप डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहता था। इसके लिए वह लखनऊ में रहकर सीपीएमटी की कोचिंग कर रहा था। अप्रैल में परीक्षा होने के बाद वह घर आया था। 28 जून को वह फिर लखनऊ जाने वाला था। पिता ने बताया कि दिलीप पढ़ाई में तेज था। पुत्र की इच्छा पर ही उन्होंने उसे पढ़ाई के लिए लखनऊ भेजा था।
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