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राज्यमंत्री को बचाने की पुलिस ने की हरसंभव कोशिश

Tue, 09 Jun 2015 09:16 PM IST
पुवायां।
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पत्रकार जगेंद्र की मौत में रिपोर्ट नहीं दर्ज करने के लिए पुलिस आठ घंटे तक बहाने पर बहाने बनाती रही, लेकिन आखिरकार पुलिस को राज्यमंत्री सहित छह लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश रचने की रिपोर्ट दर्ज करनी ही पड़ गई।
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सोमवार को जगेंद्र सिंह की लखनऊ में मौत की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जगेंद्र सिंह के परिवार और उनके साथियों की मंशा जानने को मुखबिर सतर्क कर दिए थे। सोमवार रात एसडीएम लालबहादुर और सीओ उमेश शर्मा जगेंद्र सिंह के घर पहुंचे और पिता सुमेर सिंह से मिलकर मंगलवार को शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम संस्कार करने के लिए बात की। रात तीन बजे शव घर आने से पहले ही जगेंद्र के घर के पास फायर बिग्रेड के जवानों को वाहन सहित तैनात कर दिया गया। इसके अलावा कई थानों की फोर्स, एलआईयू आदि भी जगेंद्र सिंह के घर के आसपास मुस्तैद कर दी गई। वे लोग पल-पल की खबर अधिकारियों तक पहुंचा रहे थे।
सोमवार को एसपी बबलू कुमार ने कहा था कि जगेंद्र सिंह के परिवार वाले तहरीर देते हैं तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा, लेकिन मंगलवार को स्थिति इसके उलट दिखी। पुलिस ने पूरा जोर इस बात पर लगा दिया कि रिपोर्ट दर्ज हुए बिना ही शव का अंतिम संस्कार करा दिया जाए। एएसपी आशाराम यादव को दिन में 11 बजे जगेंद्र सिंह के पुत्र ने रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी तो उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार होने तक रिपोर्ट दर्ज कर कॉपी दे दी जाएगी। इसके बाद जगेंद्र का शव श्मशान स्थल पहुंच गया।
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 श्मशान स्थल में चिता पर शव रखे जाने के बाद जगेंद्र के पुत्र ने एफआईआर की कॉपी नहीं मिलने तक अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। बनता मामला बिगड़ता देख पुलिस में हड़कंप मच गया। एएसपी ने पहले कहा कि मामला सदर क्षेत्र का है इसलिए खुटार में रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा सकती है। इस बात पर उनकी पत्रकारों से बहस भी हो गई। इसके बाद एएसपी ने कहा कि डीएम और एसपी जिले से बाहर हैं, उनके आने पर ही रिपोर्ट दर्ज हो सकेगी। इससे नाराज लोग श्मशान घाट से हटकर दूर चले गए। इस पर पुलिस ने परिवार और कुछ लोगों के माध्यम से जगेंद्र के पुत्र पर अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाया, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार पुलिस ने हथियार डाल दिए और खुटार थाने में क्राइम संख्या निल पर रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी। इसके बाद ही अंतिम संस्कार हो सका।

डटे रहे आरोपियों के समर्थक
खुटार। जगेंद्र सिंह की मौत के एक आरोपी के समर्थक जगेंद्र सिंह के हितैषी बनकर उनके घर जा पहुंचे। सोमवार रात से मंगलवार दोपहर तक यह लोग पूरी कोशिश में डटे रहे कि किसी भी तरह बिना रिपोर्ट दर्ज हुए अंतिम संस्कार करा दिया जाए। कई बार उन्हें लगा कि उनकी योजना सफल हो जाएगी, लेकिन हर बार अंत तक पहुंचते-पहुंचते मामला बिगड़ता रहा। एक व्यक्ति ने तो लोगों से यहां तक कह दिया कि यदि रिपोर्ट न दर्ज कराई जाए तो वह जगेंद्र के परिवार के लोगों को दस लाख रुपये तक दिला सकता है। इस पर जगेंद्र के परिवार वाले बिफर गए। बाद में जगेंद्र के परिचितों और नाते-रिश्तेदारों ने अंतिम संस्कार के लिए जल्दी करने वालों को जमकर फटकारा और मौके से भाग जाने को कहा। मामला बिगड़ता देख ये लोग मौके से खिसक लिए।

विधायक के पहुंचने से मिला लोगों को बल
खुटार। पत्रकार जगेंद्र सिंह के निधन की जानकारी पाकर विधायक शकुंतला देवी उनके घर पहुंचीं। इस दौरान शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा चुका था। विधायक अंत्येष्टि स्थल पर पहुंची और जगेंद्र सिंह के पिता सुमेर सिंह, पुत्र राघवेंद्र सिंह, राहुल से मामले की जानकारी ली और सांत्वना दी। सुमेर सिंह ने कहा कि पुलिस उनके पुत्र की हत्या की रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। इस पर विधायक ने उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। कहा, मुख्यमंत्री से मिलकर जगेंद्र सिंह के परिवार को सहायता राशि भी दिलवाने का प्रयास किया जाएगा। विधायक के पहुंचने से जगेंद्र सिंह के परिवार के लोगों को काफी बल मिला। भाजपा नेता सत्यभान सिंह भदौरिया, जिला पंचायत सदस्य रजनीश दीक्षित, नगर पंचायत चेयरमैन गुड्डी देवी के पति लक्ष्मण गुप्ता, पूर्व चेयरमैन अनुपम शुक्ला, व्यापार मंडल अध्यक्ष अनिल गुप्ता सहित तमाम लोगों ने जगेंद्र सिंह के घर पहुंचकर परिवार के लोगों को सांत्वना दी। इसके अलावा सरदार शर्मा, नीरज मिश्रा, सौरभ दीक्षित, दीप श्रीवास्तव, प्रेमशंकर, शिवकुमार, सुशीलशर्मा, आरिफ सिद्दीकी, रोहित यादव, राजबहादुर सिंह सहित जिले भर से तमाम पत्रकार भी मौके पर पहुंचे और शोकसभा कर जगेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के समय लोगों की भारी भीड़ रही।
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