मुरादाबाद से अपनी बेटी की सगाई के लिए आ रहे एक सिपाही की ट्रेन से गिर कर मौत हो गई। जीआरपी ने सिपाही के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा। सिपाही की मौत से उनके घर में कोहराम मचा हुआ है।
आरसी मिशन थाना क्षेत्र के मोहल्ला ख्वाजा फिरोज निवासी 58 वर्षीय श्याम नरायन शुुक्ला पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर मुरादाबाद पुलिस लाइन में तैनात थे। उनके पुत्र राजीव ने पुलिस को बताया कि उनकी बहन ममता की सगाई 24 मई को होनी थी। इसमें शिरकत करने के लिए पिता श्याम नरायन रात में ट्रेन से आ रहे थे। उनके आने की सूचना पर वह रात रोजा स्टेशन पर गए, लेकिन पिता नहीं मिले। जब उनका मोबाइल नंबर मिलाया तो वह रेलवे वेटिंग रूम के पास पड़ा मिला।
अनहोनी की आशंका होने पर जीआरपी सिपाहियों के साथ राजीव ने रात में ही अपने पिता की तलाश शुरू कर दी। सिपाही का शव रोजा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर पटरियों के बीच मिला। दोनों पैर और एक हाथ कटा था। इससे हादसा होने का अनुमान लगाया गया। जीआरपी उपनिरीक्षक नैपाल सिंह का अनुमान है कि रात को अकाल तख्त एक्सप्रेेस एक नंबर लाइन से गुजरी थी। हो सकता है कि ट्रेन नान स्टॉप होने के कारण सिपाही ने चलती ट्रेन से उतरने का प्रयास किया हो। इससे वह हादसे का शिकार हो गए। उनके थैले में किसी भी प्रकार को कोई पैसा नहीं मिला है।
बेटी के हाथ पीले करने के अरमान नहीं हुए पूरे
रोजा। बेटी के हाथ पीले करने के अरमानों को सिपाही श्याम नरायन शुक्ला पूरे नहीं कर सके। इसके लिए वह काफी दिनों से प्रयासरत थे। बताते हैं कि अभी दो साल पहले ही दवा के रिएक्शन से उसके छोटे बेटे संजय की मौत हो गई थी। किसी तरह अपने परिवार को संभालकर उसने अपनी बेटी ममता के हाथ पीले करने के लिए वर की तलाश की थी। इसकी सगाई 24 मई को होनी थी।
रात के समय अंधेरे में रहता है रोजा का रेलवे स्टेशन
रोजा। रोजा में रेल हादसे कोई नई बात नहीं है। यहां पूल प्रभारियों की लापरवाही से अक्सर बेगुनाहों की जान जाती है, लेकिन कभी रेल के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते। घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि घटना के समय स्टेशन पर बिजली नहीं थी और सिपाही श्याम नरायन को रात में कम दिखाई देने की शिकायत थी। बिजली गुल होने के कारण चलती ट्रेन से प्लेटफार्म का सही आंकलन नहीं हो सका और हादसा हो गया। यह एक दिन की बात नहीं है। रोजा स्टेशन रात के समय हमेशा अंधेरे में रहता है। यहां कि ट्यूब लाइटें नहीं जलती हैं। यदि एसएम कार्यालय से रेल संचालन न हो तो यहां की बिजली व्यवस्था पूरी ध्वस्त रहे। ऐसे में रेलयात्री अपने सफर को यहां से कैसे पूरा करते हैं सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।